नाम बदलकर जिम ट्रेनर ने प्रेम जाल में फंसाया, पत्नी के अवैध संबंध से परेशान व्यापारी ने लगाई फांसी

नाम बदलकर जिम ट्रेनर ने प्रेम जाल में फंसाया, पत्नी के अवैध संबंध से परेशान व्यापारी ने लगाई फांसी

मंदसौर,तरुण राठौर
अवैध प्रेम संबधों के चलते नगर का खुशहाल परिवार में मातम पसर गया। पत्नी के अवैध सम्बन्ध के चलते मिराज कंपनी के डीलर विश्वान्द बागोरा ने आत्महत्या कर ली| महिला की दोस्ती एक जिम के ट्रेनर से हुई और दोनों के बीच प्रेमसंबंध से विश्वान्द तनाव में थे| जिम ट्रेनर ने महिला से अपना नाम बदलकर दोस्ती की थी|

दरअसल, जिम ट्रैन महिला का जिम में ट्रेनिग देता था। इस दौरान महिला को उसने अपने प्रेम के जाल में फंसाया, ओर इसके लिए उसने खुद का नाम आर्यन बताया। जबकि उसका असली नाम अल्ताफ हुसैन है।
युवक सम्राट मार्ग पर रहता है और टोल फिटनेस के नाम से संजीत मार्ग पर जिम है, वहां पर वह कौच है। युवक की 5 साल की बच्ची भी है। उसका विवाह मल्हारगढ़ में हुआ है। वहीं जिस महिला से उसके अवैध संबद्ध है। वह भी शादी सुदा है| उसकी शादी मिराज कंपनी के डीलर विश्वान्द बागोरा से हुई थी। उनकी एक बच्ची व एक बच्चा भी है। जिम के कोच ने नाम बदलकर दोस्ती की और प्रेमजाल में फंसाया, वह कई बार उससे पैसे भी लेता था। जब यह बात विश्वान्द को पता लगी तो उन्होंने उनकी पत्नी को बात करने से मना किया | इस पर मुजफ्फर ने उन्हें रोककर धमकाया| जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मुलजिम अल्ताफ को पकड़ लिया है। जिसके फोन में कई महिलाओं के नंबर पुलिस को मिले है। जिसकी पुलिस जांच कर रही है। जबकि इस मामले को लेकर बजरंग दल ने भी एसपी को ज्ञापन सौपा है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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