कोरोना के भय से निकला था बच्चों से मिलने, अधूरा ही रह गया जिंदगी का सफर

कोरोना के भय से निकला था बच्चों से मिलने, अधूरा ही रह गया जिंदगी का सफर

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

कोरोना वायरस के चलते गरीबों की मदद के नाम पर किये जा रहे सरकार के प्रयास कितने कारगर हैं ये कहना तो मुश्किल है, लेकिन ये सच है कि कोरोना के डर से गरीबों ने पलायन शुरू कर दिया है। हालात ये हो गए हैं कि साधनों के अभाव में बेचारा मजदूर पैदल ही सेकड़ों किलोमीटर के सफर पर निकल गया है। लेकिन उसे क्या पता कि बच्चों से मिलने की आस में उसने जो ये सफर शुरू किया था वो अधूरा ही रह जायेगा।

मामला ग्वालियर जिले के पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के निरावली गाँव के पास का है। जहाँ एक पत्नी की गोद में पति ने बीच सड़क पर अंतिम सांस ली। लोग वीडियो बनाते रहे, खून से लथपथ पति को संभालती पत्नी को ज्ञान देते रहे लेकिन मदद का हाथ किसी ने नहीं बढ़ाया। और जब तक कुछ संवेदनशील लोग मददगार बनकर पहुंचे तब तब तक पति की सांसें थम चुकी थी। दरअसल टीकमगढ़ जिले के धामना गाँव का सुखलाल अहिरवार पत्नी कुसुमा के साथ दिल्ली में मजदूरी करता है। कोरोना के चलते “लॉक डाउन” में काम बंद हो गए ठेकेदार ने मना कर दिया। लाचार मजबूर सुखलाल ने कुछ दिन दिल्ली में गुजर-बसर की, लेकिन जब दिल्ली सरकार की मदद करने वाली सरकारी घोषणाएं झूठी निकलने लगी तो परेशान सुखलाल और कुसुमा को घर याद आने लगा। आखिर आता भी क्यों नहीं? दादा दादी के पास वो अपने तीन बच्चों को जो छोड़ कर आया था। पति पत्नी बिना सोचे समझे 500 किलोमीटर के सफर पर चल पड़े। चार दिन बाद 350 किलोमीटर का सफर तय कर जब वे ग्वालियर जिले की सीमा में पुरानी छावनी में निरावली गाँव के पास बीती शाम पहुंचे थोड़ी देर आराम करने के लिये हाइवे के डिवाइडर पर बैठे गए। बस यही पर सुखलाल की जिंदगी भी रुक गई। पति पत्नी में से किसी को नहीं मालूम था कि जिन बच्चों से मिलने दोनों एक साथ निकले थे उनका साथ यहीं छूट जायेगा। थोड़ी देर आराम करने के बाद जैसे ही सुखलाल उठा तभी विपरीत दिशा से एक तेज रफ्तार कार काल बनकर आई और सुखलाल को रौंदती हुई भाग गई। सुखलाल लहूलुहान होकर पांच छः फीट ऊपर उछला और जोर से जमीन पर गिर पड़ा। कुसुमा ने मदद की गुहार लगाई, कुछ लोग पहुंचे लेकिन वीडियो बनाने में व्यस्त हो गए उनकी संवेदनाएं जैसे मर गई थी। अकेली पत्नी खून में लथपथ पति को संभालती रही और असंवेदनशील लोग ज्ञान देते रहे। कुछ देर बाद कुछ संवेदनशील लोग आये उन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाये लेकिन तब तक सुखलाल की सांसें थम चुकी थी और उसका लंबा सफर वहीं बीच सड़क पर थम गया। अंतिम सांस आने तक कुसुमा कभी चिल्लाती कभी सुखलाल को सीने से लगाती लेकिन सुखलाल कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं बचा था। कुसुमा यही कहती रही तुम इस तरह छोड़कर नही जा सकते। कहते कहते वो बीच बीच में बेहोश हो जाती। इस बीच किसी ने पीछा कर दुर्घटना के लिए दोषी कार क्रमांक MP 07 CG 2534 को रायरू पर पकड़ लिया। कार ग्वालियर की बालाजीपुरम निवासी स्वाति यादव के नाम रजिस्टर्ड है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँच गई शव को उठाकर पोस्ट मार्टम के लिए भेजा और फिर कुछ समाज सेवियों की आर्थिक मदद और प्रशासन की मदद से सुखलाल के शव को पत्नी कुसुमा के साथ टीकमगढ़ के लिए रवाना कर दिया। यहाँ बड़ा सवाल ये है कि जब टोटल लॉक डाउन है और जिलों की सीमाएं सील है तो हाइवे पर कार जैसे घरेलू वाहन कैसे दौड़ रहे हैं। क्या पुलिस की नाकाबंदी सिर्फ दिखावा मात्र है, प्रशासन को इसकी समीक्षा करनी होगी।

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