अनाज की कालाबाजारी जारी, राजनीतिक दबदबे की वजह से बच रहे आरोपी

अनाज की कालाबाजारी जारी, राजनीतिक दबदबे की वजह से बच रहे आरोपी

मंदसौर।तरुण राठौर

नगर में सरकारी अनाज की जमकर काला बाजारी हो रही है। लेकिन प्रशासन है कि कालाबाजारियों के खिफाफ कोई सख्त कार्यवाही नहीं कर पा रहा है। इसी का फायदा लेते हुए व्यपारी जमकर सरकारी अनाज की हेराफेरी कर रहे है। ऐसा ही एक मामला बुधवार को शहर में देखने को मिला। जब यातायात विभाग ने एक लोडिंग वाहन में सरकारी चावल को पकड़ा। यह माल एक मंडी व्यपारी हिरेंद्र उर्फ हीरू सिंध का था। जो भाजपा का कार्यकर्ता है। ओर ये पहले भी सरकारी अनाज की हेराफेरी करते हुए पकड़ा गया था।

पर राजनीतिक वर्चस्व के चलते प्रशासनिक कारवाही से बच गया था। एक बार फिर से पकड़ाया है। जो अपने आप में एक बड़ा विषय है। क्योंकि जब प्रशासन की टीम ने इसके सभी गोदाम पर छापामार कारवाही की तो वहां से कुछ नहीं मिला। जबकि बताया जा रहा है कि ये माल कालाखेत के गोदाम से लोड किया गया था। और इससे बेचने के लिए सुवासरा ले जाया जा रहा था। परंतु चेकिंग के दौरान पुलिस ने माल से भरे वाहन को रोक। तो ड्राइवर ने बताया कि गेंहू है। पर चैकिंग की तो अंदर सरकारी चावल था। बाहर दिखाने के लिए गेंहू बिखेर रखे थे। जिससे की प्रशासन को चकमा दिया जा सके। जिसके बाद खाद्य विवरण दल को बुलाया गया। जिन्होंने आगे की कार्यवाही की। जिसके बाद व्यापारी के सभी गोदाम पर छापामार कारवाही हुई। पर शाम तक का समय मिलने की वजह से वह बिल लिया और वह कारवाही से बच गया। पहले भी वह इसी प्रकार बच गया था। कुछ दिन पहले भी प्रशासन ने सरकारी अनाज का जखीरा पकड़ा था। पर वह व्यपारी भी राजनीतिक दबदबे के चलते बच गया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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