गेहूं की खरीद को लेकर असमंजस बरकरार, सरकार ने कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट

गेहूं की खरीद को लेकर असमंजस बरकरार, सरकार ने कलेक्टरों  से मांगी रिपोर्ट

भोपाल। लॉकडाउन के बीच प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।  एक तरफ लॉकडाउन के कारण किसानों को फसल की कटाई और अन्य काम के लिये मजदूर नहीं मिल रहे हैं, वहीं बिगड़ते मौसम के कारण खेतों में खड़ी फसलों के बर्बाद होने की आशंका और बढ़ गई है।

हालांकि सरकार का कहना है कि एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू की जा सकती है लेकिन इसके लिये पहले स्थिति का जायज़ा लेना होगा। प्रत्येक जिले के कलेक्टर द्वारा रिपोर्ट दिए जाने के बाद ही उपार्जन केंद्र खोले जा सकेंगे। इसके लिये खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा सभी कलेक्टरों से उपार्जन केंद्रों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। यदि लॉकडाउन के बीच एक अप्रैल से उपार्जन केंद्र खोले जाते हैं तो कलेक्टर द्वारा ये सुनिश्चित किया जाना होगा कि वहां सारे संसाधन उपबल्ध होंगे या नहीं। संसाधनों के साथ ही लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिग के साथ अन्य आवश्यक निर्देशों का पालन कराया जाना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। लेकिन इसे लेकर शासन और प्रशासन को कोई ठोस निर्णय जल्द ही लेना होगा क्योंकि प्रदेश के एक करोड़ 11 लाख से ज्यादा किसानों की फसलें अब भी खेतों में खड़ी है और इस दौरान लगातार मौसम बिगड़ने के कारण किसानों की मुसीबत कई गुना बढ़ गई है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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