Corona effect: एमपी के समाजसेवी ने किया सेंट्राइट मशीन का निर्माण, यह है इसकी खासियत

Corona effect: एमपी के समाजसेवी ने किया सेंट्राइट मशीन का निर्माण, यह है इसकी खासियत

मंदसौर। तरुण राठौर।

इस समय देशभर में कोरोना वायरस का प्रकोप चल रहा है। जिसको देखते हुए प्रशासन ने लाकडाउन लगा रखा है। जिससे की ये महामारी ओर न फैल सके। इससे बचने के लिए जहां लोगों को सेन्ट्राइट किया जा रहा है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंस का भी पालन करने की अपील की जा रही है। ऐसे में एक समाजसेवी नारू भाई ने नवाचार करते हुए एक सेन्ट्राइट मशीन का निर्माण किया है वो भी महज 48 घण्टों में।

इस समय जहां देशभर के वैज्ञानिक इस महामारी से बचने का तरीका निकाल रहे है। इसी दौरान मंदसौर के समाजसेवी ने जो मशीन बनाई है उसके प्रयोग से नगर इस महामारी को रोका जा सकेगा। जो की इस वक़्त एक अद्वितीय योगदान है देश हित में।नारू भाई ने बताया कि इस मशीन से 1 मिनिट में 15 से 20 लोगों को सेन्ट्राइट किया जा सकेगा। इसके लिए इस मशीन में 6 फवारे लगाए है जो उसमें से निकलने वाले लोगों पर सेन्ट्राइट घोल का छिड़काव करेगे। हैरत की बात ये है कि किसी भी व्यक्ति के पैसे, कागज तक इससे गीले नही होगें। जो घोल रहेगा उसके लिए 100 लीटर की टँकी लगी होगी। साथ ही ये मशीन 5 फिट लम्बी होगी। जिसे अब प्रशासन की मदद से वो जिला अस्पताल को दान करेंगे

वहीं अस्पताल प्रबन्धक संजीव मालवीय का कहना है कि इस मशीन से जिला अस्पताल को बहुत लाभ होगा। जिसकी मदद से हम अस्पताल में आने जाने वाले नर्स डॉक्टर व अधिकारियों सहित अन्य लोगों को भी सेन्ट्राइट कर सकेंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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