नौ पत्रकारों के कोरोना सेम्पल गुम! जिम्मेदारों के पास नहीं कोई जवाब

नौ पत्रकारों के कोरोना सेम्पल गुम! जिम्मेदारों के पास नहीं कोई जवाब

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

जिला प्रशासन कोरोना जाँच को लेकर कितना गंभीर है इसका एक बड़ा उदाहरण ग्वालियर में देखने को मिला है। यहाँ जाँच के लिए इकट्ठा किये गए कुछ पत्रकारों के सेम्पलों की रिपोर्ट सात दिन बाद भी नहीं आई है। सूत्र बता रहे हैं ये सेम्पल कहीं गुम हो गये हैं। खास बात ये है कि पत्रकार बार बार फोन लगाकर पूछ रहे हैं लेकिन जिम्मेदार कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहे।

पिछले दिनों नगर निगम आयुक्त के पीए की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उस प्रेस कॉंफ़्रेंस में शामिल पत्रकारों के लिए जिला प्रशासन ने 1जुलाई को प्रेस क्लब में शिविर लगाकर सेम्पल कलेक्ट किये थे। इसमें 62 पत्रकारों ने अपने सेम्पल दिये थे। सेम्पल दिये जाने के अगले दिन 2 जुलाई को 53 पत्रकारों की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई। इनमें सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई लेकिन नौ पत्रकारों की रिपोर्ट जारी नहीं की गई। जिन पत्रकारों की रिपोर्ट नहीं आई उसमें एमपीसीजी के न्यूज चैनल IBC 24 के ब्यूरो प्रमुख नासिर गौरी, कैमरा पर्सन लोकेंद्र पाल, न्यूज़ चैनल स्वराज एक्सप्रेस मार्केटिंग हेड महादेव गुप्ता, न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ मेल टुडे के संपादक महेश झा, दैनिक भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट संजय भटनागर, पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट शशिभूषण पांडे, नेशनल न्यूज़ चैनल टाइम्स नाऊ के वरिष्ठ संवाददाता रविंद्र प्रताप सिंह, न्यूज़ पोर्टल सीधा संवाद के संवाददाता राजीव गुप्ता और लोकल न्यूज़ चैनल न्यूज़ घर तक के प्रमुख गालिब खान के नाम शामिल हैं। इन सभी पत्रकारों का सात दिन बाद भी रिपोर्ट का इंतजार है।

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने नासिर गौरी से जब बात की तो उनका कहना था कि कलेक्टर से कई बार बात की है उनका कहना है कि दिखवाते हैं। लेकिन आज कहा कि आप सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव है। एक साथ पूल टेस्ट हुए थे, जिसमें पॉजिटिव केस पर फोकस ज्यादा रहता है। लेकिन आप सभी लोग नेगेटिव है। लेकिन इसकी लिखित सूचना या रिपोर्ट नहीं दी गई है। संजय भटनागर कहते हैं कि हमें चिंता है, जब बाकी रिपोर्ट आ गई तो हमारी भी रिपोर्ट तो आनी चाहिए , उधर महादेव गुप्ता कहते हैं कि हमें पता ही नहीं है कि हम नेगेटिव है या पॉजिटिव , हमें तो चिंता सता रही है। उधर जब हमने इस मामले में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से बात करना चाही तो दो तीन बार के प्रयास के बाद भी बात नहीं हो सकी उन्होंने फोन कट कर दिया । वहीं प्रभारी सीएमएचओ डॉ बिंदु सहगल ने कहा कि मुझे इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं है। कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ अमित रघुवंशी ही बेहतर बता सकेंगे।

डॉ रघुवंशी से जब बात की तो उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सभी सेम्पल उनकी तरफ से मेडिकल कॉलेज की लैब में पहुंचा दिये गए थे वहीं मेडिकल कॉलेज की VRD लैब के प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ वैभव मिश्रा का कहना है कि उनके यहाँ कोई सेम्पल पेंडिंग नहीं है । कुल मिलाकर जिन नौ पत्रकारों की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है ऐसा लग रहा है कि सेम्पल की अधिकता के चलते वो सेम्पल कहीं गुम हो गए हैं। लेकिन मामला मीडिया से जुड़ा होने के कारण जिम्मेदार कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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