Corona warriors: संकटकाल में लोगों की मदद करने का एक संकल्प ऐसा भी

Corona warriors: संकटकाल में लोगों की मदद करने का एक संकल्प ऐसा भी

देवास।

देवास जिले के क्षिप्रा ग्रामीण क्षेत्र की एएनएम और आयुष्मान योजना की एएनएम नीलिमा परमार कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए संकटकाल में मोर्चे पर निकली एक योद्धा हैं। नीलिमा अपनी व्यक्तिगत त्रासदी को भूल ग्रामीण लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए सलाह देने और सामान पहुंचाने के लिए डोर-टू-डोर जाती है। नीलिमा लोगों को दिन में कई बार साबुन से हाथ धोने के लिए कहती है। इस लड़ाई में ग्रामीणों को मास्क और सैनिटाइज़र की उपयोगिता से अवगत करवा ती है।

नीलिमा परमार की टीम लोगों को घर पर रहने की सलाह दे रही है।इतना ही नहीं बल्कि वह लोगों को यह भी आश्वासन दे रही है कि उन्हें घरों के अंदर रहकर अपनी सुरक्षा करनी चाहिए। वह कहती है कि हम बाहर हैं और आपकी हर तरह से मदद करेंगे। नीलिमा गाँव वालों को आश्वासन दे रही है कि ग्रामीणों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा। वहीं नीलिमा बीमार लोगों के पास पहुंच रही हैं और स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। वह दीवारों पर जागरूकता संदेश लिख रही है और अन्य माध्यमों से जागरूकता बढ़ा रही है। वह लोगों को शारीरिक दूरी तय करने का महत्व समझा रही है। वह खुद लोगों को दूरी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सड़कों पर घेरे बना रही है।

हाल ही में नीलिमा के भाई की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। जहां वह केवल अपने भाई के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची थी और उसके बाद उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए ड्यूटी जॉइन कर ली थी। परिवार को सांत्वना देने के बाद वह तुरंत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए लौटी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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