Corona warriors: मुस्तैदी और दमदारी के साथ काम कर रहे हैं डॉक्टर

Corona warriors: मुस्तैदी और दमदारी के साथ काम कर रहे हैं डॉक्टर

रतलाम।सुशील खरे

रतलाम(ratlam) कोरोना वायरस(coronavirus) के संकट के इस दौर में जिला चिकित्सालय रतलाम के डॉक्टर(doctor), पैरामेडिकल स्टाफ(paramedical staff), नर्स(nurse), लैब टेक्नीशियन(lab technician) से लेकर वार्ड बॉय(ward boy) तक कोरोना वायरस योद्धा(warriors) साबित हो रहे हैं। इन्हीं योद्धाओं में से एक है डॉक्टर योगेश नीखरा जो 24 घंटे कोरोना योद्धा के रूप में मुस्तैदी और दमदारी के साथ अपनी सेवाएं जिला चिकित्सालय में दे रहे हैं। डॉ. योगेश निखरा जिला चिकित्सालय में अस्थि रोग विशेषज्ञ तथा जिला क्षय अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं परंतु वर्तमान कोरोना वायरस समय में वह सर्दी, खांसी, बुखार पर मुस्तैदी और पूरे समर्पण के साथ अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

वह रोजाना कई मरीजों का उपचार कर रहे हैं। कोरोना के संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग करते हैं, आइसोलेशन या क्वॉरेंटाइन वाले मरीजों को उचित स्थान पर भिजवाने के लिए कार्रवाई करते हैं। संदिग्ध मरीजों के सैंपल कलेक्शन भी लेते हैं। जिला चिकित्सालय के लगातार कार्यों के बीच उनके पास कई बार भोजन करने का भी समय नहीं होता है। कई दिन तो एक समय ही भोजन कर पाते हैं परंतु सेवा का जज्बा बेमिसाल है। डॉक्टर निखरा का कहना है कि जब तक सभी सौपे गये काम पूरे नहीं कर लेता हूं तब तक चैन नहीं मिलता है। वह जिला चिकित्सालय में पूरे सुरक्षा उपायों के साथ अपने कर्तव्य को निष्ठा से पूरा कर रहे हैं। पीपीई किट पहनकर अन्य सावधानियों के साथ वे सेवा कार्य कर रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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