अतिथि शिक्षकों को नियमित न करना…उपचुनाव में मंत्री जी पड़ न जाए भारी

अतिथि शिक्षकों को नियमित न करना…उपचुनाव में मंत्री जी पड़ न जाए भारी

मंदसौर।तरुण राठौर।

कोरोना काल के बीच में जिले सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने है। ऐसे में दोनों राजनीति पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगा रही। और क्षेत्र की जनता के बीच में जाकर नियमो की धज्जिया उड़ाते हुए मजमा जमा रही है। लेकिन जिले व क्षेत्र के अतिथि शिक्षक मंत्री हरदीपसिंह डंग से काफी खफा है। क्योंकि उन्हें हर बार अतिथि विद्वानों को नियमित करने का आश्वासन दिया है। परंतु अब तक आश्वासन को पूरा नहीं किया। एक बार फिर से मंत्री उपचुनाव में अपनी जीत को सुनिचित करने के लिए दौरे करते हुए क्षेत्र की जनता में पहुंच रहे है। उनके इस दौरे में कचनारा फंटे पर मंत्री जी को अतिथि शिक्षकों ने रोका और ज्ञापन सौपते हुए अपना वादा याद दिलवाया। जिसपर उन्हें फिर से आश्वासन का झुनझुना हाथ में थमाया है। जिससे क्षेत्र व जिले के अतिथि शिक्षक काफी नाराज हो गए है। जिसको लेकर अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वह हमारी बात कब से सरकार के सामने रख रहे है। कांग्रेस में थे जब भी यही कहते थे। और अब बीजेपी में मंत्री बन गए तब भी यही कह रहे है कि अगली कैबिनेट की मीटिंग में आप लोगो की बात रखूंगा। अब यदि हम लोगो को चुनाव से पहले नियमित नहीं किया जाता है तो उसका खामियां उपचुनाव में मंत्री जी को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि यहां अतिथि शिक्षकों की संख्या 1500 से अधिक है। और उनकी पहले भी विधानसभा क्षेत्र में कोई बड़ी जीत नहीं हुई है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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