लॉक डाउन में जमीनी बंटवारे को लेकर पिता-पुत्र में चली गोली, एक की मौत

लॉक डाउन में जमीनी बंटवारे को लेकर पिता-पुत्र में चली गोली, एक की मौत

मुरैना। संजय दीक्षित।

लोक डाउन में लोग अपने अपने घरों में रहकर कोरोना की जंग से लड़ रहे है तो किसी जगह जमीनी बंटवारे को लेकर एक दूसरे के खून के प्यासे बने हुए है।ऐसा ही मामला बागचीनी थाना क्षेत्र के राधिका स्कूल के पास का हैं जहां पिता पुत्र में जमीनी बंटवारे को लेकर खूनी संघर्ष हो गया।आज सुबह जमीनी विवाद को लेकर कहा सुनी हो गयी।तो एक दूसरे ने सरिया से हमला कर दिया।मामला इतना बढ़ गया कि पुत्र ने कट्टे से पिता की छाती में गोली मार दी।तभी घायल पिता ने लाइसेंसी बंदूक से पुत्र की पीठ में गोली मार दी।जिससे दोनों लोग घायल हो गए।दोनों का बीचबचाव करने पहुंची माँ भी गंभीर रूप से घायल हो गयी।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गयी और दोनों घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया ।जहाँ डॉक्टर ने कल्लू सिकरवार को मृत घोषित कर दिया और घायल कल्लू के पिता नरेंद्र सिंह सिकरवार को उपचार के बाद ग्वालियर के लिए रेफर कर दिया हैं।सूत्रों की मानें तो नरेंद्र के दो बेटे हैं।कल्लू ऑटो रिक्शा चलाकर अपना भरण पोषण करता था।जमीनी बंटवारे के विवाद को लेकर काफी समय से झगड़ा चल रहा था।जिसके बाद आज एक दूसरे में गोली बारी हो गयी।जिसमे कल्लू की मौत हो गयी।मृत युवक के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद परिजनों को सुपुर्द कर दिया हैं।तनाव को देखते हुए गाँव मे पुलिस बल तैनात कर दिया हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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