माफिया की दबंगई: सर्चिंग पर निकले वन रक्षक की गोली मारकर हत्या

माफिया की दबंगई: सर्चिंग पर निकले वन रक्षक की गोली मारकर हत्या

ग्वालियर। जंगल में अवैध लकड़ी काटने वाले गिरोह की सूचना पर सर्चिंग पर गए वन रक्षक के एक अज्ञान हमलावर ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद वन विभाग के अधिकारी वर रक्षक को लेकर अस्पताल भागे जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच में ले लिया है। माना जा रहा है कि हत्या या तो किसी शिकारी ने की है अथवा ये लकड़ी माफिया का काम है।

ग्वालियर के आरोन थाना क्षेत्र में स्थित करई वन चौकी पर तैनात वन रक्षक दीपू राणा की अज्ञात हमलावर ने गोली मारकर हत्या कर दी। एसडीओ फॉरेस्ट जीके चंद के मुताबिक आज सुबह जंगल में अवैध लकड़ी काटने वाले कुछ लोगों की मौजूदगी की सूचना करई वन चौकी को मिली थी। सूचना के बाद चौकी पर तैनात वन रक्षक दीपू राणा दो चौकीदारों के साथ सर्चिंग पर गए थे। वन विभाग की टीम की सूचना मिलते ही लकड़ी काटने वाले भाग गए। उसके बाद जब दीपू राणा चौकी की तरफ लौट रहे थे तब झाड़ियों में छिपे अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें बंदूक से गोली मार दी। जिससे वे गिर पड़े। चौकीदारों की सूचना पर विभाग के लोग उसे अस्पताल लेकर भागे जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी पुलिस को दे दी गई है। मृतक का शव पीएम के लिये भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि गोली या तो किसी शिकारी ने मारी है अथवा जंगल में अवैध लकड़ी काटने वाले गिरोह के सदस्य ने। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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