नायब तहसीलदार ने क्लर्क के माध्यम से ली 50,000 रुपये की रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा

तहसील कार्यालय में आवेदक ने रिश्वत की राशि 50 हजार रुपये सहायक ग्रेड 3 नरेंद्र नरवरिया को दी जो उसने अपनी टेबल की दराज में रख ली। रिश्वत राशि लेते ही आसपास तैनात लोकायुक्त दल ने आरोपी बाबू को पकड़ लिया।
Lokayukta Police Indore Action

मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस घूसखोरों के खिलाफ कड़े एक्शन मोड में है, इसी क्रम में इंदौर लोकायुक्त पुलिस कार्यालय की टीमें लगातार रंगे हाथ रिश्वतखोरों को पकड़ रही है, इसी क्रम ने आज एक बार फिर 50000/- रुपये की रिश्वत लेते दो शासकीय सेवकों को गिरफ्तार किया है

लोकायुक्त पुलिस कार्यालय इंदौर से मिली जानकारी के मुताबिक ग्रेटर ब्रजेश्वरी, इंदौर के निवासी एडवोकेट कृष्ण कुमार डांगी ने एक शिकायती आवेदन ऑफिस में दिया था जिसमें उनसे  नायब तहसीलदार द्वारा रिश्वत मांगे जाने के आरोप लगाये गए थे।

भूमि नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार और क्लर्क ने मांगी रिश्वत 

आवेदक ने बताया कि उसकी विधवा बुआ भगवंतिबाई, निवासी ग्राम खराडीया की भूमि के नामांतरण हेतु बाबू नरेंद्र नरवरिया द्वारा नायब तहसीलदार खुड़ैल दयाराम निगम के साथ मिलकर 50,000/- रुपए रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस इंदौर एसपी के निर्देश पर सत्यापन कराया गया।

रिश्वत लेकर तहसील कार्यालय बुलाया था 

लोकायुक्त कार्यालय ने जब शिकायत का सत्यापन कराया तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद आज 30 सितम्बर 25 को आवेदक से रिश्वत राशि लेना तय हुआ। आरोपियों ने आवेदक को रिश्वत राशि लेकर तहसील खुड़ैल कार्यालय बुलाया।

रिश्वत हाथ में आते ही लोकायुक्त पुलिस ने दबोचा 

इतनी जानकारी मिलने के बाद लोकायुक्त एसपी ने ट्रैप दल गठित कर ट्रैप प्लान किया, तहसील कार्यालय में आवेदक ने रिश्वत की राशि 50 हजार रुपये सहायक ग्रेड 3 नरेंद्र नरवरिया को दी जो उसने अपनी टेबल की दराज में रख ली। रिश्वत राशि लेते ही आसपास तैनात लोकायुक्त दल ने आरोपी बाबू को पकड़ लिया।

निलम्बन अवधि में भी क्लर्क ने ली रिश्वत 

उल्लेखनीय है कि क्लर्क नरेंद्र नरवरिया निलंबित है और वर्तमान में तहसील कनाडिया में अटैच है जहाँ ये रिश्वत लेते पकड़ा गया है।  लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7,61(2) के अंतर्गत  मामला दर्ज कर जाँच में ले लिया है।

इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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