Innovation: सिंगरौली में तीन लड़कों ने मिलकर बनाया सैनिटाइजर मशीन

Innovation: सिंगरौली में तीन लड़कों ने मिलकर बनाया सैनिटाइजर मशीन

सिंगरौली। राघवेन्द्र सिंह गहरवार

कोरोना वायरस(coronavirus) के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार सभी को समझाइश के साथ आग्रह भी कर रही है कि सोशल डिस्टेंस का पालन करें साबुन से हाथ को धोएं,हाथ को सैनिटाइज करें। इसी प्रकार मध्य प्रदेश(madhyapradesh) के सिंगरौली(singrauli) जिले के ग्राम पंचायत क्षेत्र नौढिया के 3 बच्चों ने सेनिटाइजर(sanitizer) मशीन का आविष्कार करते हुए नौढिया के गोरबी बाजार में मशीन को चला कर ट्रायल किया। जिसकी स्थानीय लोगो ने खूब सराहना किया,जब पूरी दुनिया खुद को समेटे हुए अपने आप को बचा रही है।

वही गोरबी के सचिन पांडेय, मंजीत श्रीवास्तव, बादल गुप्ता इन 3 लड़को ने मिलकर लगभग 8000 रुपये लागत की अपने पॉकेट मनी से सेनिटाइजर मशीन का अविष्कार करके यह सिद्ध कर दिया है कि मुसीबत की घड़ी में भारत देश का हर एक नागरिक हरेक बच्चा देश हित में कतार के पहले नंबर पर खड़ा है। इन लड़कों से बातचीत से पता चला की लॉकडाउन की स्तिथि में सेनिटाइजर मशीन बनाने में काफी कठिनाइयां का सामना करना पड़ा। बच्चों ने बताया कि मशीन बनाने में जो सम्मान की आवश्यकता थी। सारी दुकानें बंद होने के कारण हम लोग मशीन बनाने में अपने आप को असमर्थ महसूस कर रहे थे। लेकिन किसी तरफ से उन्होंने मशीन का अविष्कार कर डाला।  वही तीनो बच्चो ने जिला प्रशासन से निवेदन करते हुए कहा है कि अगर हम लोग को सहायता प्रदान किया जाए तो हम लोग निस्वार्थ भावना से मशीन बनाकर आम जनों की सहायता करना चाहते हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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