खरगोन: SI ने थाना प्रभारी पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, दिया इस्तीफ़ा

खरगोन: SI ने थाना प्रभारी पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, दिया इस्तीफ़ा

खरगोन।त्रिलोक रामणेकर

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद में थाने पर पदस्थ एसआई सत्यनारायण सोनगरा ने थाना प्रभारी राजेंद्र सोनी पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर इस्तीफा दिया है । वही टीआई ने आरोप को निराधार बताया है। एसआई सत्यनारायण सोनगरा ने बताया कि अपना इस्तीफा पुलिस अधीक्षक के नाम से थाना प्रभारी को सौंपा है और पिछले 37 वर्षो से पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने वर्षो से ईमानदारी व मेहनत से इस क्षेत्र में काम किया है। लेकिन जब से सनावद थाने में पदस्थ हुअा तब से लगातार मेरे साथ थाना प्रभारी राजेंद्र सोनी जातिगत भेदभाव कर रहे हैं। पूर्व में कई बार अपमानित कर चुके हैं। अपशब्दों का प्रयोग करते हैं।

रविवार को राजेंद्र सोनी ने मेरे साथ अपमानजनक व्यवहार किया। पूर्व में कई बार प्रताड़ित कर चुके हैं। लेकिन विभागीय मजबूरियों के कारण वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दर्ज नहीं कराई। शुरु से मेरे साथ दूरी बनाकर रखी। राजेंद्र सोनी की पहुंच उपर तक है। शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होती। इसलिए में चुपचाप सहन करता रहा। लेकिन रविवार की घटना के बाद से मैं बहुत दु:खी हूं। इसके कारण में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे चुका हूं। इस्तीफा देने के बाद अभी मुझे चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया। राजेंद्र सोनी के खिलाफ मेरी लड़ाई आगे तक जारी रहेगी।

वही टीआई राजेन्द्र सोनी ने कहा की मेरे द्वारा कभी ऐसी बात नही की गई है और जो आरोप लगा रहा है सभी आरोप निराधार है । मेरे वरिष्ट अधिकारी खुद जाच कर ले । अगर में दोसी पाया जाता हूं तो मेरे पर कार्यवाई करे। मेने कभी भी अपने स्टॉप के साथ कोई दुर्व्यवहार नही किया है। उन्हें अपने परिवार के समान समझता हूं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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