Lockdown: कर्फ्यू में थोड़ी ढील के बाद उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

Lockdown: कर्फ्यू में थोड़ी ढील के बाद उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

मंदसौर।तरुण राठौर

कोरोना पॉजिटव मिलने के बाद से ही प्रशासन ने नगर में कर्फ्यू लगा दिया है। इस दौरान नगर की जनता को रहात देते हुए प्रशासन ने 1 से 4 बजे तक किराने की दुकान खोलने की इजाजत दी। जिससे नगर के लोग इस मुसीबत के समय में सामान खरीद सके। जबकि पुलिस मुस्तैद है और अन्य साधनों से शहर पर निगाह रख रही है। लेकिन फिर भी नगर के लोग कर्फ्यू में उसे नियम का पालन नहीं करके चुनौती दे रहें है । इसका उदाहरण रविवार को मिला जब कर्फ्यू के दौरान 1 से 4 बजे तक मार्केट खुला।

नगर की जनता का जमावड़ा बाजार में गया। हर कोई नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नजर आया। जहां खरीददारी कर रही जनता सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रही थी। कुछ लोगों ने तो मुँह पर मास्क भी नही लगा रखा था। हर कोई दुकान पर झुंड बनाके इस घातक बीमारी की परवाह किए बिना सामान खरीद रहे थे। नगर में स्थिति खराब होती देख पुलिस प्रशासन बाजार में पहुंचा ओर लोगों अपील की 1 से 4 बजे तक रोज बाजार खुलेगा। बस आप लोग मुँह पर मास्क लगाए। और समान खरीदते वक्त सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दूर दूर खड़े रहे। जिसमें आपकी और आपके परिवार का हित है। यदि कोई व्यपारी नियम का पालन नहीं करता है तो उसकी दुकान बन्द की जाएगी। यही नहीं कई लोग तो कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए अपनी दुकान का आधा शटर खोलकर बैठे थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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