नहीं थम रहा कोरोना का कहर, 4 नए मरीज मिले, 83 हुई संख्या

नहीं थम रहा कोरोना का कहर, 4 नए मरीज मिले, 83 हुई संख्या

मंदसौर।तरुण राठौर। लगातार तीन दिन से मिल रहे कोरोना मरीज की वजह से हड़कंप माहौल बना हुआ है। किंतु खुशी भी है कि मिलने वाले मरीजो से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या है। वहीं गुरुवार को रतलाम से आई रिपोर्ट में 4 नए मरीज मिले है। लिहाजा कोरोना संक्रमितों 79 से बढ़कर 84 पर पहुंच गई है। जो सभी गुदरी क्षेत्र के है। ओर जिसकी वहज से कोई नया क्षेत्र कन्टेंटमेंट एरिया में तब्दील नहीं हुआ है। बल्कि कुछ लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के चलते कुछ क्षेत्र कन्टेंटमेंट एरिया से मुक्त हुए। जबकि गुरुवार सुबह 3 पॉजेटिव आने के बाद रात्रि में आई रिपोर्ट में एक पॉजेटिव और बढ़ा था।

सीएमएचओ डॉ.महेश मालवीय ने बताया कि आज कोरोना के 36 सेम्पलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें 32 सेम्पल नेगेटिव आये है, 3 रिपोर्ट रिजेक्ट हुई है तथा 1 नया कोरोना पॉजेटिव मिला है। यह भी गुदरी कन्टेंमेंट एरिये का ही है।जबकि मंदसौर में अब कुल कोरोना पॉजेटिव केस 83 हो गए है जिसमें 40 स्वस्थ होकर सकुशल घर लौट गये है, 6 की मौत हुई है और 37 एक्टिव केस है। जबकि मिली अधिकारिक जानकारी के अनुसार जीवागंज केस में दशरथ जैन, चंदा संचेती, इंद्रा संचेती, सुशील संचेती, अशांशु संचेती सहित चिकित्सक ओर स्वास्थकर्मी की रिपोर्ट भी नेगेटिव आई हे।
जबकि नेगेटिव में 6 एक्टिव मरीज़ भी शामिल हे। जिनकी आज छुट्टी की जाएगी। ये राहत की ख़बर हे। वही पिंकी, भावना ओर तेमुर का सेम्पल फिर भेजने की जानकारी भी सामने आई हे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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