लगातर हो रही है मौत, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठने लगे है सवाल

लगातर हो रही है मौत, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठने लगे है सवाल

मन्दसौर।तरुण राठौर।

वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर मन्दसौर को रेड जोन में है मन्दसौर का हॉटस्पॉट गुदरी तोड़ा बना हुआ है यहां से 30 से अधिक मरीज पॉजिटिव निकले हैं लगातार एक के बाद एक मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है जबकि 2 मौत कोरोनावायरस हुई है हाल ही में जो दो महिलाओं की मौत हुई है उनमें कोरोना सिम्टम्स दिखाई दिए थे लेकिन शासन की नई गाइडलाइन के चलते इन मृतक महिलाओं का कोई सैंपल नहीं लिया गया । जिससे इस बात की पुष्टि हो सके की मृतक महिलाएं कोरोना संक्रमित थी या नहीं थी। गत दिवस हुसैन बानो की मौत ने गुदरी क्षेत्र में सबको भयभीत कर दिया है अचानक सांस लेने में तकलीफ होने के पश्चात महिला को जिला अस्पताल उपचार हेतु ले जाया गया था लेकिन यहां डॉक्टर ने महिला का परीक्षण करने के पश्चात उसे क्वॉरेंटाइन सेंटर भेजा गया परंतु आधे रास्ते से ही एंबुलेंस के ड्राइवर के पास फोन आया कि महिला को वापस जिला हॉस्पिटल ले जाया जाए और ड्राइवर ने एंबुलेंस को जिला अस्पताल लेकर आ गया महिला को आइसोलेट वार्ड में भर्ती किया गया उसे ऑक्सीजन दी गई लेकिन कुछ ही देर में महिला ने दम तोड़ दिया यहां यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि क्या जिला चिकित्सालय में कोविड-19 लक्षण दिखने वाले मरीज के उपचार हेतु संपूर्ण व्यवस्था है अगर यह तो फिर अन्य मरीजों को क्वॉरेंटाइन सेंटर मैं क्यों भेजा जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंदसौर जिला चिकित्सालय में वेंटिलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है कि गंभीर मरीज को वेंटीलेटर की सुविधा दी जा सके अगर कल समय रहते हैं हुसैन बानो क्वॉरेंटाइन सेंटर पहुंच जाती और उसे वेंटीलेटर पर रख दिया जाता तो आज वह शायद इस दुनिया में रहती लेकिन सुविधाओं के अभाव में उसने दम तोड़ दिया क्या मंदसौर जिला प्रशासन इसी प्रकार व्यवस्थाओं में हर बार अमूल चूल परिवर्तन करता रहेगा और इसी प्रकार मरीज दम तोड़ते रहेंगे गुदरी हॉट स्पोर्ट होने के बाद भी जिला प्रशासन ने वहां सुव्यवस्थित तरीके से इसके नहीं स्कैनिंग नहीं कराई इसकी परिणीति इस बात से साबित होती है कि लगातार बुधनी क्षेत्र से कई मरीज उपचार हेतु जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं कंटेनमेंट जॉन होने के कारण आखिर मरीज अपने परिजनों के साथ बिना सुरक्षा व्यवस्थाओं के सीधे जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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