मुरैना: अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही के बाद एसडीएम ने लिया संज्ञान, मां बेटे को पहुंचाया घर

मुरैना: अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही के बाद एसडीएम ने लिया संज्ञान, मां बेटे को पहुंचाया घर

मुरैना।संजय दीक्षित

कोरोना संक्रमण के चलते शहर में लोक डाउन की स्थिति निर्मित हैं।जिसके बाद वाहनों की आवाजाही भी पर पूर्ण तरीके से प्रतिबंधित कर दी गयी हैं।लॉक डाउन के दौरान स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है।जिसमे 75 बर्ष के बेटे को अपनी माताजी को उपचार के बाद घर ले जाने के लिए साधन उपलब्ध कर सका और अस्पताल से घर ले जाने के लिए कड़कती धूप में श्रवण कुमार बनना पड़ा।

घर पर गिरने के कारण राधे की माँ के सिर में 12 टाँके आये थे।आज छुट्टी कराने के बाद राधे अपनी 100 वर्षीय माँ को कड़कती धूप में अपने कन्धे पर बिठा कर ले जा रहा रहा था। बेटा जब चलते चलते थक गया तो कोतवाली थाना के सामने रुकने का सोचा तो वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने डाँट के भगा दिया, परन्तु 75 साल के बेटे ने हार नही मानी और चलता रहा।बस स्टैंड पर जाकर पत्रकार साथियों ने इन्हें रोका पानी पिलाया और कई बड़े अधिकारियो को कॉल भी लगाया परन्तु जबाब नही आया फिर एम्बुलेंस वालो को लगाया फिर भी जबाब नही आया ।

इसके बाद जब एसडीएम आर एस बाँकना को फोन लगाया तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लिया और अपनी स्वयं की गाड़ी में ड्राइवर एवं उनके अंगरक्षक को भेजकर घर तक छुड़वाने का आदेश दिया।लेकिन दुख इस बात का है 38 से 40 डिग्री की तपती धूप में श्रवण कुमार बने बेटे पर किसी को इन पर दया नही आई और तो और वो स्वास्थ्य विभाग ने बोल दिया कि आने की लिए एम्बुलेंस होती हैं जाने के लिए नही होती हैं।मामले को संज्ञान में लेते हुए एसडीएम ने कार्यवाही की बात कही हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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