MP By-Election: अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण को लेकर यह क्या बोले सिंधिया

MP By-Election: अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण को लेकर यह क्या बोले सिंधिया

उज्जैन, डेस्क रिपोर्ट

सोमवार को उज्जैन(ujjian) दौरे पर आए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक वादे ने आगामी उपचुनाव() के लिए कांग्रेस(congress) को बड़ी चिंता दे दी है। कांग्रेस जहां उपचुनाव मैं अतिथि विद्वानों के मुद्दे को लगातार उठा रही थी वहीं अब सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आदित्य विद्वानों को लेकर बड़ा वादा किया है। उज्जैन दौरे पर आए सिंधिया ने अतिथि विद्वान से मुलाकात कर उन्हें आश्वासन दिया है कि शिवराज सरकार की प्राथमिकताओं में अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण शामिल है और सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर विद्वानों को खुशखबरी देगी।

दरअसल सोमवार को उज्जैन में अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल डॉक्टर मनीष प्रजापति नीता तोमर और सुनीता सोलंकी के नेतृत्व में राज्यसभा सांसद(Rajya Sabha MP) और बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) से मुलाकात करने पहुंचा था। अतिथि विद्वानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को दोहराया है। जिसके बाद बीजेपी नेता और सांसद सिंधिया ने कहा है कि आपका नियमितीकरण हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। वहीं उन्होंने अतिथि विद्वानों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही अतिथि विद्वानों को लेकर शिवराज सरकार बड़ा फैसला करेगी।

हालांकि कांग्रेस(congress) की कमलनाथ सरकार(kamalnath government) ने इन्हें सेवा से बाहर कर दिया था। ये वही सिंधिया हैं जिन्होंने कांग्रेस में रहते तत्कालिक सरकार को बोला था कि अगर अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण नहीं हुआ तो वो इनके साथ सड़क पर उतर जाएंगे। जिसके बाद इस मुद्दे पर काफी सियासत गरमाई थी।  वहीँ शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) भी लगातार अतिथि विद्वान के नियमितीकरण की मांग कमलनाथ सरकार से कर रहे थे।लेकिन इसके बाद से अबतक शिवराज सरकार ने इन पर कोई फैसला नहीं लिया है अब सिंधिया ने इनको नया आश्वासन दिया है।

बता दें कि मध्यप्रदेश(madhyapradesh) में अतिथि विद्वानों(atithi vidhwan) की सरकार(government) से लड़ाई आज तक जारी है।प्रदेश में कमलनाथ सरकार के आते ही उन्होंने 9 महीने से अतिथि विद्वानों को सेवा से बाहर कर दिया गया था। तब से वो अपने नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। वहीं अबतक 5 अतिथि विद्वानों ने आत्महत्या कर मौत को गले लगाया है। जिसके बाद उपचुनाव में प्रदेश की सरकार इनके नाम को चुनावी मुद्दा बना रही है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews