मध्यप्रदेश ड्रायवर महासंघ द्वारा अपने विभिन्न मांगों को लेकर ‘भोपाल चलो’ पदयात्रा और प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। महासंघ के आह्वान पर देशभर से आए ड्रायवरों ने 7 अप्रैल को इंदौर के राजवाड़ा से पदयात्रा शुरू की, जो देवास नाके तक पहुंची। इसके बाद ये सभी ड्रायवर भोपाल पहुंचे जहां 8 अप्रैल को अंबेडकर मैदान में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया गया।
ये अपनी चौदह सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को ज्ञापन भी सौंपेंगे। संगठन के बैनर तले ड्रायवरों ने अपील की है कि अपने मान-हक की लड़ाई के लिए सभी ड्रायवर भोपाल पहुंचें और भार्ड संघ का साथ-सहयोग करें। इन्होंने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गई तो ये अपने आंदोलन को और तेज़ करेंगे।
ड्रायवरों का अपनी मांगों को लेकर आंदोलन
मध्यप्रदेश के व्यावसायिक ड्रायवरों के अधिकारों और कल्याण के लिए सक्रिय “मध्यप्रदेश ड्रायवर महासंघ इंदौर” ने अपने अधिकारों की मांग करते हुए ‘भोपाल चलो’ अभियान के तहत राजधानी पहुंचे। महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि पहले अंबेडकर मैदान में धरना दिया जाएगा इसके बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यह आंदोलन ड्रायवर समुदाय के अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक सुविधाओं की मांग को लेकर किया जा रहा है।
सरकार से कर रहे हैं ये मांगें
ये सरकार के सामने चौदह मांगें रख रहे हैं जिनमें ड्रायवरों के प्रति आम जनता में बढ़ते आक्रोश और विवाद को रोकने के लिए सुरक्षा एवं जागरूकता उपाय किए जाने, गाड़ियों के लिए पर्याप्त पार्किंग और शौचालय की व्यवस्था हो तथा ड्रायवरों के लिए विश्राम गृह बनाए जाने सहित अन्य मांगें शामिल हैं। इनकी ये मांगें इस प्रकार हैं:
- आम जनता द्वारा ड्रायवरों के प्रति बढ़ते आक्रोश और विवाद को रोकने के लिए सुरक्षा व जागरूकता उपाय किए जाएं।
- गाड़ियों के लिए पर्याप्त पार्किंग और शौचालय की व्यवस्था की जाए।
- ड्रायवरों के लिए विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) बनाए जाएं।
- 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना लागू की जाए।
- ड्रायवरों को द्वितीय श्रेणी सैनिक का दर्जा दिया जाए।
- सड़क दुर्घटना में ड्रायवर की मृत्यु होने पर 20 लाख बीमा, अपंग होने पर 10 लाख, और इलाज के लिए 5 लाख की सहायता तय की जाए।
- ड्रायवरों के लिए आवास योजना के तहत 5 लाख की आर्थिक सहायता दी जाए।
- ड्रायवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए।
- राजमार्गों पर ड्रायवरों को प्रशासन द्वारा प्रमाणित (ऑथराइज्ड) पहचान दी जाए।
- ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की ₹15,000 फीस कम की जाए, ताकि गरीब वर्ग के ड्रायवर भी लाइसेंस प्राप्त कर सकें।
- हर साल 1 सितंबर को ‘ड्रायवर दिवस’ घोषित किया जाए।
- ड्रायवर आयोग और ड्रायवर वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जाए।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 106(2) को पूरी तरह निरस्त (रद्द) किया जाए।
- ड्रायवर सुरक्षा कानून बनाया जाए और ड्रायवरों के साथ मारपीट/अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।






