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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, इनामी नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ किया सरेंडर, बस्तर में नक्सलवाद की टूटी कमर

Written by:Gaurav Sharma
Last Updated:
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जहां 25 लाख रुपये के इनामी और वेस्ट बस्तर डिवीजन के खूंखार कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है। हिडमा के बाद सबसे खतरनाक माने जाने वाले पापा राव के इस कदम को नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, इनामी नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ किया सरेंडर, बस्तर में नक्सलवाद की टूटी कमर

बीजापुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। बस्तर के जंगलों में दशकों से दहशत का पर्याय रहे 25 लाख के इनामी माओवादी कमांडर पापा राव ने अपने 17 अन्य साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। सभी ने बीजापुर जिले के कुटरू थाने में पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। इस घटना को केंद्र सरकार के नक्सल मुक्त भारत अभियान के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

पापा राव का सरेंडर ऐसे समय में हुआ है जब सरकार ने पूरे देश से, विशेषकर बस्तर से, नक्सलवाद को खत्म करने की डेडलाइन तय कर रखी है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय और एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पापा राव का मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

कौन है दो दशकों से आतंक का पर्याय रहा पापा राव?

पापा राव का असली नाम मंगू दादा उर्फ चंद्रन्ना है और वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 साल से ज्यादा उम्र का पापा राव 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा था। वह माओवादियों की वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर था और कई बड़े नक्सली हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का आरोपी रहा है।

कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद पापा राव को उस इलाके का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर माना जाता था। सुरक्षाबलों ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, लेकिन वह कई बार घेराबंदी तोड़कर भागने में सफल रहा था।

नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में बड़ी कामयाबी

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षाबल लगातार अभियान चला रहे हैं। पिछले कुछ समय में सैकड़ों नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, लेकिन पापा राव जैसे बड़े कमांडर का आत्मसमर्पण इस अभियान की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक है।

स्थानीय लोगों ने भी इस खबर पर राहत की सांस ली है। उनका मानना है कि अगर पापा राव जैसा बड़ा कमांडर मुख्यधारा में लौट आया है, तो यह नक्सलवाद की आखिरी कड़ी के टूटने जैसा है। सुरक्षा अधिकारी इसे बस्तर में शांति की बहाली की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

Gaurav Sharma
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