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स्कूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8वीं बार कलेक्टर दफ्तर पहुंचा बुजुर्ग, जमीन पर लेटकर किया अनोखा प्रदर्शन

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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बुजुर्ग को इस तरह फर्श पर लेटे और विलाप करते देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षा गार्ड्स ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बुजुर्ग को समझा-बुझाकर जमीन से उठाया और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।
स्कूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8वीं बार कलेक्टर दफ्तर पहुंचा बुजुर्ग, जमीन पर लेटकर किया अनोखा प्रदर्शन

Neemuch old man reaches collector’s office for 8th time

नीमच जिले के अलोरी गरवाड़ा निवासी बुजुर्ग चांदमल चारण सरकारी स्कूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर एक बार फिर न्याय की आस में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यह उनकी 8वीं दस्तक थी। बार-बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से आहत इस बुजुर्ग ने इस बार विरोध का एक बेहद मार्मिक और अनोखा तरीका अपनाया।

विरोध का मार्मिक दृश्य

कलेक्टर कार्यालय परिसर में चांदमल चारण अपनी हताशा जाहिर करते हुए सीधे फर्श पर लेट गए। वे जमीन पर लेटकर गोल-गोल घूमने लगे और दोनों हाथ जोड़कर प्रशासन से गुहार लगाने लगे। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है—”न तो सरकार सुन रही है और न ही प्रशासन।”

पुलिस ने बुजुर्ग को कराया शांत

बुजुर्ग को इस तरह फर्श पर लेटे और विलाप करते देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षा गार्ड्स ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बुजुर्ग को समझा-बुझाकर जमीन से उठाया और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। शिक्षा के मंदिर (स्कूल) की जमीन को भूमाफियाओं से मुक्त कराने के लिए एक बुजुर्ग का यह निरंतर संघर्ष और उनकी यह बेबसी, स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और जनसुनवाई की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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