MP: IPS बनकर जमा रहा था धौंस, पुलिस ने धर दबोचा, हो सकते हैं कई खुलासे

MP: IPS बनकर जमा रहा था धौंस, पुलिस ने धर दबोचा, हो सकते हैं कई खुलासे

उज्जैन, डेस्क रिपोर्ट

कोरोना(corona) संकटकाल(Crisis) के बीच एक तरफ जहां लॉकडाउन(Lockdown) के बीच जनता अपने घरों में लॉक है। वहीं दूसरी तरफ अपराध के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। नए-नए तरकीबें के जरिए अपराधिक घटना के मामले में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसा ही एक मामला और मध्यप्रदेश के उज्जैन(Ujjain of Madhya Pradesh) में सामने आया है। जहां एक धोखेबाज खुद को आईपीएस अफसर(IPS Officer) बताते हुए लोगों से पैसे लूटने के काम कर रहा था। लोगों की शिकायत पर उसकी पोल खुली और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल मामला उज्जैन का है। जानकारी के मुताबिक यह अपराधी व्यक्ति इस अवसर पर टोल टैक्स नाके पर खड़ा हो गया। अपना नाम ज्योतिर्मय विजयवर्गीय बताते हुए यह व्यक्ति लोगों से पैसे लूटने का भी काम कर रहा था।टोल टैक्स(Toll Tax) कर्मचारियों को जब इस पर संदेह हुआ तो उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत की। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस टोल टैक्स नाके पर पहुंची और उस व्यक्ति की जांच पड़ताल में लग गई।

पुलिस ने मामले की जांच करते हुए बताया कि यह व्यक्ति इंदौर(indore) का रहने वाला है और उसके माता-पिता देवास में रहते हैं।अब तक इस व्यक्ति ने कई लोगों को ठगा है। जिसके बाद इसके पास से 100 चेक बुक सहित एक लग्जरी कार मिलने की जानकारी सामने आई है। यह व्यक्ति बैंक अकाउंट(Bank account) का चेक(cheque) देकर लोगों से पैसे लेता था। वहीं इससे पहले भी इसने कई लोगों के साथ आईपीएस विपिन माहेश्वरी(IPS Vipin Maheshwari) के नाम से धोखाधड़ी की है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।वहीँ इस मामले में अब कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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