मुरैना।संजय दीक्षित।
मुरैना में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या के बीच जहां कोरोना वारियर्स याने डॉक्टर्स, नर्स, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, जनसेवक सहित अधिकारियों व कर्मचारियों का आमजनता हौंसला बढ़ा रही है। ऐसा ही वीडियो मुरैना के उमेश पाठक वाली गली का है जहाँ मोहल्लावासियों ने डोर टू डोर कचरा उठाने वाले कर्मचारियों का अनूठे अंदाज में स्वागत किया।वार्ड नंबर 37 उमेश पाठक वाली गली के समस्त नागरिकों ने स्वच्छता कि गाड़ी के ड्राइवर और सफाई करने वाले कर्मचारी का सम्मान किया। थाली में गुलाब की पंखुड़ियों को दूर से ही उड़ाकर पहले तो सत्कार किया गया और उसके बाद फूल माला डालकर , रोरी से तिलक लगाकर और शॉल नारियल देकर उसका स्वागत कर पैसों से न्यौछावर करते हुए करतल ध्वनि से भारत माता जिंदाबाद के नारे लगाते हुए धन्यवाद दिया। इस समय शहर व देश के लिए कैसे वारियर्स अपनी जान पर खेलकर लोगो की जिंदगी बचाने में जुटे है।इसका जीता जागता उदाहरण सभी जगह देखने को मिल रहा हैं।
डोर टू डोर कचरा उठाने वाले कर्मचारियों का फूल मालाओं से स्वागत
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






