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Morena Bus Fire: पोरसा जा रही चलती बस में लगी भीषण आग, यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

Written by:Bhawna Choubey
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मुरैना से पोरसा जा रही एक यात्री बस में अचानक धुआं उठने के बाद अफरा-तफरी मच गई। चालक की सतर्कता और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस हादसे ने बसों की सुरक्षा और नियमित जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुरैना जिले में रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा टल गया, जब यात्रियों से भरी एक बस में अचानक आग लग गई। बस मुरैना से पोरसा की ओर जा रही थी और रास्ते में इंजन की तरफ से धुआं निकलने लगा। जैसे ही चालक की नजर धुएं पर पड़ी, उसने तुरंत बस को सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद बस में बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

गनीमत यह रही कि चालक ने समय रहते स्थिति को समझ लिया। सभी यात्रियों को तुरंत बस से नीचे उतारा गया। कुछ लोगों ने जल्दबाजी में बस से कूदकर अपनी जान बचाई। कुछ ही मिनटों में बस के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई और आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस क्रमांक MP-06P-1425 गंजरामपुर और जींगनी गांव के बीच पहुंची थी, तभी इंजन के नीचे से तेज धुआं निकलने लगा। यदि चालक कुछ देर और बस चलाता रहता तो आग पूरी बस में फैल सकती थी। इससे दर्जनों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

बस में आग लगने की घटना ने बढ़ाई यात्रियों की चिंता

इस घटना के बाद यात्रियों में डर और चिंता का माहौल देखने को मिला। कई यात्रियों ने बताया कि धुआं उठते ही बस के अंदर घुटन जैसी स्थिति बनने लगी थी। अचानक हुई इस घटना से बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घबरा गए थे। हालांकि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में वाहनों के इंजन और वायरिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि नियमित सर्विसिंग और तकनीकी जांच समय पर नहीं की जाए तो ऐसे हादसों का खतरा बढ़ सकता है। बसों में फायर सेफ्टी उपकरण और आपातकालीन व्यवस्था का सही तरीके से काम करना भी बेहद जरूरी माना जाता है।

स्थानीय लोगों की तत्परता भी इस घटना में महत्वपूर्ण रही। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और पानी डालकर आग को फैलने से रोक दिया। उनकी मदद से स्थिति जल्द नियंत्रण में आ गई।

सड़क सुरक्षा और वाहन जांच पर फिर उठे सवाल

मुरैना की इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर दिन हजारों लोग बसों के जरिए एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा करते हैं। ऐसे में वाहनों की तकनीकी जांच और फिटनेस प्रमाणन को लेकर सख्ती जरूरी मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बस संचालकों को नियमित अंतराल पर इंजन, वायरिंग, ईंधन प्रणाली और ब्रेक सिस्टम की जांच करानी चाहिए। छोटी तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी प्रभावी होनी चाहिए।

घटना के बाद सभी यात्रियों को अन्य साधनों से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि यह घटना भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत की ओर साफ संकेत देती है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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