मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के पहाड़गढ़ मुख्यालय में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि सरकारी अस्पताल, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), छात्रावास और आश्रमों में रहने वाले लोगों को पीने के पानी तक के लिए जूझना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार बालक और कन्या छात्रावास समेत पांच छात्रावासों तथा दो आश्रमों में पिछले तीन-चार दिनों से नियमित पानी की सप्लाई बंद है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें समय पर नहाने, कपड़े धोने और पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। कई बच्चों को शौच के लिए भी बाहर जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।
छात्रावास और अस्पताल में बढ़ी परेशानी
पानी की सबसे ज्यादा मार छात्रावासों और अस्पताल पर पड़ रही है। बालक छात्रावास के छात्र आदित्य आदिवासी ने बताया कि कई दिनों से पानी नहीं आने के कारण सभी बच्चे परेशान हैं। वहीं कक्षा तीन के छात्र दीपू आदिवासी ने कहा कि कई-कई दिन बिना स्नान किए रहना पड़ रहा है। कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भी जल्द से जल्द पानी की व्यवस्था करने की मांग की है। कक्षा 12 के छात्र रौनक का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो कई छात्रों को मजबूरी में घर लौटना पड़ सकता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दस्त से पीड़ित मरीज लक्ष्मी आदिवासी ने बताया कि अस्पताल में पानी नहीं होने के कारण बाहर से पानी मंगवाना पड़ रहा है। अस्पताल के डॉक्टर डॉ. पुष्पेंद्र कुमार दुबे ने भी माना कि पानी की कमी से मरीजों और स्टाफ दोनों को दिक्कत हो रही है। वहीं एनआरसी में भी बच्चों की देखभाल और साफ-सफाई प्रभावित हो रही है। सफाई कर्मचारी उषा वाल्मीकि के अनुसार पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नियमित सफाई करना मुश्किल हो गया है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
अधिकारियों को कई बार सूचना
छात्रावास और आश्रम के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार पंचायत और विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है। बालक छात्रावास के अधीक्षक देवदत्त मुद्गल के मुताबिक पंचायत द्वारा पाइपलाइन में किए गए बदलाव के बाद से छात्रावास तक पानी पहुंचना बंद हो गया है। वहीं कन्या छात्रावास की अधीक्षिका सुनीता सिकरवार ने बताया कि मजबूरी में रोज टैंकर मंगवाना पड़ रहा है, जिस पर करीब 600 रुपये प्रति टैंकर खर्च हो रहे हैं, जबकि एक टैंकर का पानी सिर्फ एक दिन ही चल पाता है।
बालक आश्रम के अधीक्षक सतीश धाकड़ ने बताया कि कई बार पत्र लिखने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। कन्या आश्रम की अधीक्षिका सपना शर्मा ने भी जल्द स्थिति का जायजा लेने की बात कही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेयजल संकट अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर असर डाल रहा है।
ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पहाड़गढ़ में पेयजल संकट का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कब तक निकलता है।






