लॉकडाउन में पुलिस को चुनौती, तीन बदमाशों ने सब्जी विक्रेता से सब्जी और रुपयों से भरी थैली लूटी

लॉकडाउन में पुलिस को चुनौती, तीन बदमाशों ने सब्जी विक्रेता से सब्जी और रुपयों से भरी थैली लूटी

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

लॉक डाउन में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए बाइक सवार तीन बदमाशों ने सरे राह दिन दहाड़े एक सब्जी विक्रेता महिला को लूट लिया। लुटेरे सब्जी और महिला की रुपयों से भरी थैली लेकर भाग गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है।

ग्वालियर शहर को चारों दिशाओं को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त फूलबाग चौराहे से महज कुछ मीटर की दूरी पर दिन दहाड़े एक सब्जी विक्रेता महिला को तीन बदमाशों ने लूट लिया और पुलिस व्यवस्था को चुनौती देते हुए फरार हो गए। फरियादी धन्ती कुशवाह के मुताबिक वो सब्जी का ठेला लगाती है, फूलबाग क्षेत्र में मारकंडेश्वर मंदिर के पास जब वो पहुंची तो एक काली बाइक पर तीन युवक मुँह पर कपड़ा बांधे आये। उन्होंने 2000 रुपये का नोट देकर 300 रुपये की सब्जी खरीदी। जैसे ही फरियादी ने रुपये वापस करने के लिए कमर से थैली निकाली बदमाश उससे 2000 का नोट, रुपयों से भरी थैली और सब्जी लूट कर भाग गए।फरियादी महिला के मुताबिक थैली में करीब 3000 रुपये थे। पीड़ित महिला पड़ाव थाने पहुंची तो पुलिस ने उसे आवेदन देने का सुझाव देकर लौटा दिया। लेकिन जब मीडिया ने टीआई ज्ञानेंद्र सिंह को घटना बताई और दबाव बनाया तब पुलिस ने मामला दर्ज किया। टी आई ने बदमाशों को जल्दी गिरफ्तार करने का भरोसा दिलाया। घटना। सीसीटीवी में कैद हो गई है जिसके आधार पर बदमाशों की तलाश की जा रही है। बहरहाल लॉक डाउन में कड़ी सुरक्षा के बीच दिन दहाड़े सरे राह लूट की घटना पुलिस की चौकसी पर सवाल खड़े कर रही है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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