सियासत: “महाराज” समर्थक मंत्री बोले- “हमारे स्वभाव में है चुनौती स्वीकार करना “

सियासत: “महाराज” समर्थक मंत्री बोले- “हमारे स्वभाव में है चुनौती स्वीकार करना “

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। शिवराज सरकार के राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया का कहना है कि चुनौती स्वीकार करना हमारे स्वभाव में है। वे ग्वालियर में राजमाता विजया राजे सिंधिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया की छत्री पर पुष्पांजलि अर्पित करने ग्वालियर आये थे।

शिवराज सरकार में राज्यमंत्री बनाये गए सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक ओपीएस भदौरिया शुक्रवार को ग्वालियर आये। वे थीम रोड स्थित सिंधिया राजवंश की छत्री पर पहुंचे और राजमाता विजया राजे सिंधिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया की मूर्तियों पर पुष्पांजलि अर्पित की। पत्रकारों से बात करते हैं राज्यमंत्री भदौरिया ने कहा कि जो प्रेरणा और संकल्प हमने राजमाता साहब और बड़े महाराज साहब के सामने लिया था , जिनके प्रेरणा से हम राजनीति में आये उनका आशीर्वाद लेने आया था । उपचुनावों में कितनी चुनौती है इस सवाल के जवाब में सिंधिया समर्थक राज्यमंत्री ने कहा कि चुनौती स्वीकार करना हमारे स्वभाव में हैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ जनता एकबार फिर हमको समर्थन देगी। विभागों के बंटवारे के सवाल पर राज्यमंत्री ने कहा कि ये वरिष्ठ नेतृत्व का मामला है मुझे उम्मीद है एक दो दिन में निर्णय हो जायेगा। गौरतलब ओपीएस भदौरिया भिंड जिले से कांग्रेस विधायक थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया केसाथ भाजपा में आ गए थे। वे सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं। पिछले दिनों ही वे राज्यमंत्री बनाये गए हैं और उन्हे उप चुनाव में उतरना है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews