राहुल गांधी ने सिंधिया को किया इग्नोर

राहुल गांधी ने सिंधिया को किया इग्नोर

मध्य प्रदेश के सियासी ड्रामे के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद राहुल गांधी ने 11 मार्च को सोशल मीडिया पर जो ट्वीट किया, उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया को साफ तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया है। राहुल गांधी ने ट्वीट करके मोदी पर निशना साधा और पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) को टैग करते हुए कहा कि जब आप लोकतांत्रिक तरीके से बनी सरकार को गिराने में मसरूफ थे तब एक बार भी आपको यह ध्यान नहीं आया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 35% नीचे गिर गई है। क्या आप 60 रुपए प्रति लीटर से कम कीमतों में पेट्रोल और डीजल को लाकर जनता को लाभ पहुंचाएंगे? इससे हमारी चरमराई अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी। इस प्रकार से राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना तो साधा लेकिन अपने मित्र एवं करीबी रह चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया को कुछ नहीं कहा।

सिंधिया को राहुल गांधी से नहीं दिय अपांटमेंट

ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे समय से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से नाराज चल रहे थे और इस बारे में कई बार बात करने के लिए सिंधिया ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से संपर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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