“रामराजा” के दर्शन को तरसे भक्त, पुलिसकर्मी रोज दे रहे “गार्ड ऑफ आनर”

“रामराजा” के दर्शन को तरसे भक्त, पुलिसकर्मी रोज दे रहे “गार्ड ऑफ आनर”

ओरछा।मयंक दुबे।

पांच सौ वर्ष में यह पहला मौका है जब बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले प्राचीन नगर ओरछा में राजा के रुप में विराजमान रामराजा सरकार पिछले सत्रह दिन से भक्तों को.दर्शन नहीं दे रहे हैं। मंदिर परिसर में पुजारियों के अलावा किसी अन्य का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। पर, देश के एक मात्र मंदिर जहां रामजी राजा के रुप मे विराजत हैं, उनकी राजशाही परंपराएं लाकडाउन के बीच भी बदस्तूर जारी हैं। चारों समय की आरती में रामराजा सरकार को मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा प्रतिदिन सशस्त्र गार्ड आफ आनर दिया जा रहा है। पान और इत्र अर्पित किया जा रहा है।

रामराजा सरकार से जुड़ी एक लोककथा है, जिसमे ऐसा उल्लेख है कि रामजी ने बुंदेला राजाओं से वचन लिया था कि रामराजा के दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति ओरछा के अंदर भूखा नहीं रहना चाहिए, तभी से भगवान के.दोपहर के राजभोग व रात्रि में ब्यारी के भोग के बाद मंदिर के दरवाजे पर लोगों को भोजन वितरित किया जाता है, पर लाकडाउन में मंदिर परिसर तक लोग ही नहीं. पहुंच पा रहे हैं तो.भोजन वितरण की परंपरा का निर्वाह कैसे हो। इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने मुख्य सड़क पर स्टाल लगवाकर तथा गरीब बस्तियों में भेजकर रोजाना भगवान की आरती के बाद भोजन वितरण कराया जा रहा है।

भोजन वितरण की इस परंपरा के पीछे एक ल़ोककथा प्रचलित है , कहा जाता है कि सोलहवी शताब्दी में गबदू नाम के पुजारी रामराजा मंदिर की सेवा पूजा करते थे, इसी दौरान नेपाल जनकपुर से संत ओरछा आए, उनकी न तो.दोपहर में भोजन की कोई व्यवस्था हुई न रात में रात की ब्यारी आरती के बाद उन्होंने रामराजा. के पुजारी से भोजन कराने को कहा पर उन्होंने पहले तो उपेक्षा कर दी बाद.में.कुछ थ़ोडा बहुत भोजन लाए इस बात से संत नाराज हो गए तथा उन्होने भोजन करने से इंकार करते हुए कहा कि वह जनकपुर से आए हैं,इस नाते जानकी जी उनकी जीजी हैं तथा.रामजी जीजाजी अब जब तक.वे स्वयं आकर भोजन नहीं कराएंगे अन्न जल ग्रहण नहीं करेगा मंदिर बंद. होने. के.बाद भी भूखे बैठे भक्त के सामने भगवान झुक गए तथा उन्होंने बालक के रुप में प्रकट होकर मंदिर परिसर मे ही एक हलवाई को जगाकर अपनी अंगूठी गिरवी रखकर संत को भोजन कराया। सुबह होने पर जब पुजारी ने सेवा पूजा की तो भगवान के हाथ से अंगूठी गायब थी, चारों ओर शोर मच गया। हलवाई भी दरबार में पहुंचा और उसने सारा वाकया सुनाया। इसके बाद पुजारी को भी संत की बात याद आ गई और उन्होंने भगवान के सामने अपनी गलती. मानी और.इसके बाद से ही मंदिर के सामने भोजन वितरण की परंपरा का सूत्रपात हुआ जो आज तक चल रही है।

Gaurav Sharma
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