लॉकडाउन में घर पर पहुंचेगा राशन, प्रशासन ने शुरू किया चलित सुपर मार्केट

लॉकडाउन में घर पर पहुंचेगा राशन, प्रशासन ने शुरू किया चलित सुपर मार्केट

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

लॉक डाउन में घर में रह रहे लोगों को घर तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था प्रशासन ने की है। खासकर उन गरीब और ऐसे परिवारों के लिए ये व्यवस्था की गई है जो एप के माध्यम से ऑन लाइन राशन की व्यवस्था नहीं कर पाते। शुक्रवार को दो चलित सुपर मार्केट वाहनों के माध्यम से इस सेवा को शुरू किया गया। इसमें प्रशासन ने 500 रुपये का एक पैकेट तैयार किया है जिसमें आटा, चावल, दाल, तेल, नमक और मसाले हैं।

शहर के लोगों को घर तक राशन पहुंचाने के लिए नगर निगम ने चलित सुपर मार्केट वाहन से सप्लाई शुरू की है। इस सेवा का शुभारंभ आज दो गाड़ियों से किया गया दोनों गाड़ियों को चार शहर का नाका हजीरा से कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन एवं नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वाहन में प्रशासन ने थोक बाजारी मूल्य पर 500 रुपये का एक पैकेट बनाया है जिसमें आटा 5 किलो 130 रुपये, दाल तुअर एक किलो 100 रुपये, चावल दो किलो 60 रुपये, सरसों का तेल एक लीटर 100रुपये, नमक एक किलो 20रुपये और मसाले हल्दी, धनिया,लाल मिर्च, जीरा प्रत्येक 100ग्राम 90 रुपये में दिया जा रहा है हैं। प्रशासन की इस व्यवस्था का शहर के गरीब लोग स्वागत कर रहे हैं उनका कहना है कि इससे हमारी परेशानी दूर होगी और हमें घर से बाहर नहीं निकलना पड़ेगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि हमने अभी इसे शहर के कुछ वार्ड से शुरू किया है धीरे धीरे सभी वार्डों के लिए चलित सुपर मार्केट की व्यवस्था की जायेगी।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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