सागर: बाहर से आये लोगों को प्रशासन ने दी घर में रहने की सख्त चेतावनी

सागर: बाहर से आये लोगों को प्रशासन ने दी घर में रहने की सख्त चेतावनी

सागर।

एक तरफ जहां कोरोना के चलते पूरी दुनियां के लोग घरों में रह रहे हैं। लाकडाउन के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार यह निवेदन कर रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति घर से बाहर न निकले। जो जहां है वहीं रहे लेकिन लोग दूसरे राज्यों और जिलों से चोरी छिपे अपने घरों की तरफ भागते आ रहे हैं। और अपनी जानकारी छिपा रहे हैं।

वहीं कुछ लोग क्वारंटाइन का पालन न करते हुये खुले आम घूम रहे हैं। इसी के चलते प्रशासन की टीम भी सख्त हो गई हैं और घर जाकर सख्त चेतावनी भी दे रही हैं कि पहले अपनी जांच करवाओ और 14 दिन तक अपने घर में रहें। अगर घर में जगह न हो तो हम रहने की व्यवस्था करेंगें।वहीं नायब तहसीलदार सुरखी वैभव बैरागी अपनी टीम लेकर सुरखी पहुंचे और इंदौर से आये लोगों को क्वारंटाइन का पालन करने की चेतावनी दी और घर पर नोटिस भी चस्पा कर दिया। जिसमें बात न मानने पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी लिखी है। सुरखी क्षेत्र के अनेकों गांव में महाराष्ट्र गुजरात इंदौर सहित अनेकों जगह से लोग चोरी छुपे अपने अपने घरों की ओर आ रहे हैं। जिससे संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है लेकिन लोगों में जागरुकता की कमी नजर आ रही है। इसी दौरान टीम ने शासकीय राशन दुकानों का निरीक्षण भी किया और तीन महीनों के राशन वितरण की जांच भी की और स्टाक वितरण का लेखा जोखा भी देखा की तीन महीनों का राशन बांटा भी गया है या नही।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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