SaReGaMa विनर ईशिता विश्वकर्मा ने सुशांत सिंह राजपूत को दी श्रद्धांजलि, कही ये बड़ी बात

SaReGaMa विनर ईशिता विश्वकर्मा ने सुशांत सिंह राजपूत को दी श्रद्धांजलि, कही ये बड़ी बात

जबलपुर।संदीप कुमार

एक जिंदादिल इंसान जो कि हमेशा खुश रहता हो,चाहे फिल्म का सेट हो या फिर रियलिटी शो जिस जगह भी यह इंसान जाता था। वहां पर हंसी ही गूंजती थी। हम बात कर रहे हैं 34 साल के स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत की जिसने की मुम्बई में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।सुशांत की मौत से पूरा फिल्म जगत के कलाकार भी शोक में है। सारेगामा विनर ईशिता विश्वकर्मा ने भी सुशांत सिंह राजपूत को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान उन्होंने सुशांत सिंह के साथ साझा किए गए उन पलों को सामने रखा। ईशिता विश्वकर्मा के गानों की जमकर तारीफ करने वाले सुशांत सिंह के विषय मे ईशिता विश्वकर्मा कहती है एक उम्दा-खुशदिल इंसान कैसे मौत को गला लगा सकता है ये समझ से परे है अभी भी यकीन नही हो रहा है की वो अब हमारे बीच नही है। ईशिता ने बताया कि जब वो सारेगामा के सेट पर आए थे तो सभी प्रतियोगियों ने खूब हँसी मजाक किया था।सारेगामा के मंच पर जब सुशांत सिंह आए थे तो उन्होंने इतनी कम उम्र में अच्छा गायन को लेकर ईशिता की जमकर तारीफ भी की थी।फ़िल्म ऐक्ट्रेस सुशांत सिंह की मौत पर दुख जताते हुए ईशिता ने कहा कि हम कलाकारो के लिए ये समय बहुत ही खराब दौर का है,हम ढाई माह से लॉक डाउन है।

लॉक डाउन वन में अब सभी संस्थाएं धीरे धीरे खुल रहे है पर सरकार कलाकारों को राहत देने के मूड में कही से भी नही दिख रही है।ईशिता विश्वकर्मा ने कहा कि आज सरकार कलाकरों को भूल गई है। सुशांत सिंह की मौत पर ईशिता ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक अच्छा कलाकार जो सिर्फ हंसना जानता था वो क्यो आखिर डिप्रेशन में आ गए ये वजह हम सब लोगों को जाननी होगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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