मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर क्या बोले सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न तोमर

मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर क्या बोले सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न तोमर

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

सत्ता परिवर्तन कर मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में गए 6 पूर्व मंत्रियों को जगह मिलना तय माना जा रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री ने मिनी मंत्रिमंडल बनाकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हालांकि मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले पूर्व खाद्य मंत्री और सिंधिया के नजदीक माने जाने वाले प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि “मेरा लक्ष्य पद नहीं है मेरा लक्ष्य सेवा है और मैं वही कर रहा हूँ”

मंत्रिमंडल गठन सर पहले कयास लगाए जा रहे थे कि सिंधिया समर्थक सभी 6 पूर्व मंत्रियों को उसमें जगह मिलेगी लेकिन कोरोना के कारण बड़ा मंत्रिमंडल स्थगित कर शिवराज सिंह चौहान ने पांच सदस्यों का मिनी मंत्रिमंडल गठित कर लिया। जिसमें भाजपा के नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल और मीना सिंह और सिंधिया समर्थक तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री बनाया गया है। हालांकि माना ये जा रहा था कि सिंधिया के गृह जिले से इमरती देवी या प्रद्युम्न सिंह तोमर में से किसी को एक को जगह अवश्य मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उधर मंत्रिमंडल मंडल में जगह नहीं मिलने के बाद पूर्व खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि ये मिनी मंत्रिमंडल जनता कि सेवा की लिए बना है। हम पद के लिए नहीं आये हैं जनता की सेवा करने के लिए आये हैं। उन्होंने कहा कि मैं जनता का सेवक हूँ, मेरा लक्ष्य पद नहीं जनता की सेवा है। मेरे इन हाथों से जितनी सेवा हो सकेगी करूँगा मैं तो इसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ। सत्ता परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका के बाद भी जगह नहीं मिल पाने के सवाल पर पूर्व मंत्री ने कहा कि कोई तो नींव बनता हैं और जब नींव अच्छी होगी तभी तो कंगूरे अच्छे होंगे। हमारी वाली पीढी अच्छी दिखेगी। उन्होंने कहा कि ये कहना गलत है कि ग्वालियर चंबल संभाग को जगह नहीं मिली। डॉ नरोत्तम मिश्रा हैं मंत्रिमंडल में। हम भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और पार्टी नेतृत्व निर्णय लेगा हमें स्वीकार है। उप चुनाव की तैयारी के सवाल पर प्रद्युम्न ने कहा कि ये चुनाव का समय नहीं है इस समय तो कोरोना महामारी को मिलकर हराना है। उन्होंने कहा कि मैं अभी चुनाव के बारे में सोच भी नहीं रहा मैं उस अंतिम व्यक्ति के बारे में सोच रहा हूँ जिसे आंटे की जरूरत है, जिसके भूखे बच्चे को दूध की जरूरत है और जिस बीमार को दवा की जरूरत है। मैं अभी उसकी सेवा में लगा हूँ।

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