Sehore: कोरोना से युद्ध के बीच दिन और रात अपनी सेवाएं दे रहे ये कोरोना वारियर्स

Sehore: कोरोना से युद्ध के बीच दिन और रात अपनी सेवाएं दे रहे ये कोरोना वारियर्स

सीहोर।अनुराग शर्मा

जिला अस्पताल में कोरोना से लड़ने वाले डॉक्टर दिन-रात इस लड़ाई को जीतने के लिए काम में जुटे हुए हैं। 10 से 12 डॉक्टरों की एक टीम जो कोरोना के काम को देख रही है। इनमें कई 12 घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं तो कुछ ऐसे हैं जो रात को अस्पताल से सोते भी हैं। दोपहर का लंच भी वही बनता है और यह वही पर बैठकर एक साथ भोजन करते हैं।

जब भी संभावित मरीज आते हैं तो यह टीम उसका चेकअप करती है। इसके बाद स्क्रीनिंग और बुखार के साथ अन्य पूछताछ करती है। इस टीम में सिविल सर्जन डॉ आनंद शर्मा के अलावा कोरोना के नोडल अधिकारी डॉक्टर आरके वर्मा, डॉक्टर नवीन मेहरा, पीएस आरमो डॉक्टर सुधीर श्रीवास्तव, डॉ अर्चना राजपूत, डॉ अमिता रीजवानी, डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ सुनीता बरुआ, डॉ उमेश श्रीवास्तव है। इनमें डॉक्टर पीएस आरमो और डॉक्टर नवीन मैहर अस्पताल में रात को रुकते हैं

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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