श्रमिक स्पेशल ट्रेन के रुके पहिये, खाना पानी के लिए भटक रहे मजदूर, देखे वीडियो

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के रुके पहिये, खाना पानी के लिए भटक रहे मजदूर, देखे वीडियो

खंडवा।सुशील विधानी

देशभर में जब से लॉकडाउन हुआ है। मजदूरों की समस्या बढ़ती ही जा रही है। राज्य और केंद्र सरकार ने मैंने तो चला दी लेकिन इन ट्रेनों में मजदूरों को भोजन की व्यवस्था ना होने के कारण इधर उधर भटकना पड़ रहा है। यही कारण है कि मुंबई गुजरात सहित अन्य महानगरों से आ रहे मजदूर ट्रेनों में भूख के मारे परेशान हैं। परेशानी भी इसलिए उत्पन्न हुई है कि लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को लेकर दौड़ रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के पहिए शुक्रवार सुबह थम गए। कारण ट्रैक पर सिग्नल नहीं मिलना रहा।

सुबह करीब 7 बजे सूरज-बलिया श्रमिक स्पेशल ट्रेन खंडवा स्टेशन पर पहुंची लेकिन भोपाल मंडल से सिग्नल नहीं मिलने के कारण स्टेशन पर ही खड़ा किया गया। इसी दौरान सुबह करीब 8 बजे मुंबई-पटना श्रमिक स्पेशल भी स्टेशन पर पहुंच गई। जिसे लूप लाइन पर लिया गया। दोनों ही गाडिय़ां स्टेशन पर करीब साढ़े चार घंटे तक खड़ी रही। इस दौरान ट्रेनों में सवार मजदूर खाना और पानी के लिए भटकते रहे। वहीं रेलवे द्वारा मजदूरों की व्यवस्था नहीं किए जाने पर वह शहर में पहुंचे। कुछ मजदूर नगर निगम की रसोई में पहुंचकर खाना लाए।

सिग्नल न मिलने के कारण बगमार, बुरहानपुर में भी खड़ी गाडिय़ां

भोपाल मंडल से सिग्नल नहीं मिलने के कारण खंडवा सहित, कोहदड़, बगमार और बुरहानपुर स्टेशन पर भी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें खड़ी है। वहीं खंडवा आने वाली गाड़ी भी भुसावल में फंसी हुई है। अलग-अलग स्टेशनों पर तीन से चार घंटों से गाड़ी ट्रेनों के कारण मजदूर परेशान हो रहे हैं। हालांकि सुबह 11.40 बजे सिग्नल मिलने पर खंडवा से सूरज-बलिया स्पेशल को रवाना किया गया है।

ट्रेन में नहीं पानी और न मिल रहा खाना

मजदूरों ने बताया ट्रेन में मुंबई और सूरज से सफर कर उत्तर प्रदेश जा रहे हैं, लेकिन ट्रेन में न तो पानी मिल रहा है और न ही खाने के लिए खाना। कल रात से भूखे हैं। अब स्टेशन पर आकर गाड़ी रूक गई। पिछले चार घंटे से फंसे हैं, लेकिन खाना नहीं मिला। खंडवा स्टेशन पर मजदूर खाने के लिए भटकते रहे। कुछ मजदूरों ने कहा ट्रेनों में पानी 20 रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं शौचालयों में गंदगी है। सफाई नहीं हो रही। यही कारण है कि मजदूर खंडवा में ट्रेन रुकते ही सड़कों पर उतर गए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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