जिला प्रशासन ने बनाए दुगने खरीदी केंद्र, सुरक्षा बरतते हुए शुरू हुई गेहूँ की खरीदी

जिला प्रशासन ने बनाए दुगने खरीदी केंद्र, सुरक्षा बरतते हुए शुरू हुई गेहूँ की खरीदी

जबलपुर।संदीप कुमार

कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लागू कर्फ्यू और लॉक डाउन के बीच गेहूं की खरीदी का काम जबलपुर जिले में प्रारंभ हो गया। जिला प्रशासन ने गेहूं खरीदी के लिए 153 केंद्र बनाए हैं। जिनमें प्रतिदिन एक हजार किसानों से गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। निर्देशों के अनुसार एक दिन में सिर्फ छह किसानों से खरीदी की जाएगी।

सुबह शाम सिर्फ 6 किसान आएंगे खरीदी केंद्र

जिला प्रशासन के निर्दशानुसार सुबह के वक्त 3 किसान और शाम के वक्त तीन किसानों से गेहूं खरीदी का काम किया जाएगा। इसके लिए प्रतिदिन सिर्फ छह किसानों को एसएमएस भेजे जा रहे हैं। एसएमएस के बिना किसानो से गेंहू नहीं खरीदा जाएगा। गेहूं खरीदी केंद्र वेयरहाउस में ही बनाए गए हैं जिससे गेहूं खरीदने के बाद वेयरहाउस तक ले जाने का खर्च बचेगा। सभी वेयरहाउस के सामने किसानों के लिए सैनीटाइज़र, मास्क,हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की व्यवस्था की गई है। और साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे इसके लिए मार्किंग भी की गई है।

अधिकारियों और किसानों के बैठने की जगह अलग से बनाई गई

गेंहू खरीदी केंद्र पर अधिकारियों के बैठने की जगह भी निश्चित है और जो किसान आएंगे वह भी अलग-अलग स्थानों पर ही बैठेंगे। तमाम व्यवस्थाएं पुख्ता कर ली गई हैं। जिला प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है। जिसमें किसान अपने किसी भी समस्या को लिख सकते हैं और अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं व्हाट्सएप पर मिली हुई समस्याओं का निराकरण तुरंत किया जाए इसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. किसान खरीद केंद्र तक आसानी से पहुंच सकें इसके लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।

शुरुआती समय मे खाली है खरीदी केंद्र,नही आ रहे है किसान

ज्यादातर खरीद केंद्रों पर किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचे है।अधिकारी और अन्य अमला किसानों की रास्ता देखता रहा, लेकिन किसान नहीं पहुंच रहे है। जिससे अधिकारियों में मायूसी देखी जा रही है हालांकि अधिकारी इस बात से निराश नहीं है उनका मानना है कि जिन किसानों को एसएमएस भेजा गया है वे जल्द ही अपनी उपज लेकर खरीद केंद्र तक पहुंचेंगे। इधर वेयरहाउस संचालक भी किसानों का इंतजार करते रहे क्योंकि यह सारी व्यवस्थाएं उनके द्वारा ही की जा रही हैं। संचालकों का मानना है कि किसानों के लिए अपनी उपज बेचना बेहद आसान होगा इसके लिए उन्होंने पर्याप्त इंतजाम किए हैं।

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