DAMOH: लॉकडाउन के बीच इस अलग अंदाज़ में बच्ची ने मनाया अपना जन्मदिन

DAMOH: लॉकडाउन के बीच इस अलग अंदाज़ में बच्ची ने मनाया अपना जन्मदिन

दमोह।गणेश अग्रवाल

लॉकडाउन(lockdown) के बीच एक 14 वर्षीया बच्ची ने अलग अंदाज़ में अपना जन्मदिन(birthday) मनाया है। शहर की ओजस्विनी स्कूल की कक्षा आठवीं की एक छात्रा वैशाली कुशवाहा उम्र 14 वर्ष ने अपनी मां जिला अस्पताल(hospital) में पदस्थ स्टाफ नर्स(staff nurse) के सहयोग से जन्मदिन मनाने की ‘हट” की। वैशाली ने कोरोना योद्धाओं के बीच पहुंचकर जन्मदिन मनाने का निर्णय लिया। खुद कॉलोनी से फूल तोड़े मालाएं बनाई और कुछ पुष्प अलग से तोड़कर रखे। घर पर मिठाई बनाई और फिर ले जाकर के कोरोना योद्धा पुलिस जवानों के साथ एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ उसने जन्मदिन मनाया। मालाएं खुद ना पहनते हुए उसने पुलिस जवानों को मालाएं पहनाई पुष्प से वर्षा की और अपने जन्मदिन की खुशियां अपनी मां एवं अन्य परिजनों के साथ मनाते हुए अपने जन्मदिन को यादगार बनाया।

वैशाली ने अपनी मां भागवती पटेल से जाना कि वह किस तरह से जिला अस्पताल में पहुंचकर मरीजों की सेवा कर रही हैं उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद जब पुलिस जवानों को भी लोगों की जान बचाने के लिए की जा रही सेवा को देखा तो उससे रहा नहीं गया और उसने को रोना योद्धाओं से के साथ मिलकर जन्मदिन मनाने का निर्णय लिया और आखिरकार उसने अन्य लोगों को भी यह संदेश दिया कि हमें कोरोना वायरस जैसी महामारी से अगर बचना है तो सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए उनकी सेवा में लगे कोरोना योद्धाओं की फिक्र करना चाहिए और घरों में रहकर खुद की सुरक्षा करना चाहिए। जिससे कोरोना योद्धाओं की मेहनत सफल हो सके। इस दौरान पुलिस जवानों ने भी वैशाली का जोरदार सम्मान किया और हैप्पी बर्थडे का गीत गाकर खुशियां मनाई और उसे भरपूर प्यार दिया।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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