कोरोना से अनजान हैं आदिवासी, जागरूकता की जगह अधिकारी कर रहे कार्यवाही की बात

कोरोना से अनजान हैं आदिवासी, जागरूकता की जगह अधिकारी कर रहे कार्यवाही की बात

जबलपुर।संदीप कुमार।

कोरोना वायरस संक्रमण से जहां पूरा देश लड़ रहा है और सरकार इस वायरस से बचने के लिए जनता को लगातार जागरूक भी कर रही है कि आप लोग मास्क पहने और सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें। इधर सरकार के निर्देशों को भले ही शहरों में पालन किया जा रहा हो पर आदिवासी बाहुल्य इलाकों में संक्रमण बीमारी से लोग पूरी तरह से अनजान हैं। इतना ही नहीं आदिवासी इलाके के लोग मास्क पहनना भी पसंद नहीं करते। जबलपुर जिले में एक तिहाई क्षेत्र आज भी आदिवासियों से भरा हुआ है। खासतौर पर जबलपुर-डिंडोरी के बीच लगे गांव जहां पर की आदिवासी पूरी तरह से जंगल और सरकारी योजनाओँ पर निर्भर है।

नही जानते आदिवासी क्या है कोरोना वायरस

कुंडम विधानसभा में रहने वाले आदिवासी ग्रामीणों से जब पूछा कि कोरोना वायरस बीमारी क्या है और कैसे इससे बचा जाता है तो उन्होंने हँसकर न में सिर हिला दिया। हालांकि गाँव मे कभी कभार स्वास्थ्य कर्मी आकर मास्क पहनने और दूर दूर रहने की सलाह देते है यह जरूर कहा।कुछ भी ग्रामीणों को न मास्क पहनना अच्छा लगता है और न ही एक दूसरे से दूर रहना।

सुरक्षा और बचाव की जानकारी नही 

ग्रामीण ललती बाई ने बताया कि कोरोना बीमारी को लेकर कुछ लोगों से सुना जरूर है पर उसकी सुरक्षा और बचाव कैसे की जाती है यह नहीं पता इस संबंध में ना ही कभी सरपंच सचिव ने जानकारी दी और ना ही कभी जनपद के अधिकारी या स्वास्थ्य के अमले ने।

स्वास्थ कर्मचारियों ने मास्क दिया पर पहनने से होती है घुटन

कोरोना वायरस को लेकर आदिवासी ग्रामीण कितनी जागरुक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को जो मास्क दिए गए हैं वह घरों में यहां वहां पड़े हैं।ग्रामीणों का कहना है कि मास्क लगाने से घुटन होती है और इस लिहाज से वह मास्क नहीं लगाते इसके साथ ही घरों में लोग झुंड बनाकर बैठ रहे हैं।

ग्रामीणों को जागरूक करने की जगह अधिकारी बोल रहे कार्यवाही की बात

कोरोना वायरस संक्रमण जैसी घातक बीमारी से आज भी दूरअंचल गांव के ग्रामीण अनजान हैं। प्रशासन को इन्हें मास्क पहनने और दूर-दूर रहने की सलाह देने चाहिए तो प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि जो लोग शासन के निर्देशों का पालन नही कर रहे है उन पर कार्यवाही होगी।

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