बारिश में गेहूं और चने को भारी नुकसान, पर्ची जनरेट नहीं होने के कारण रुका रहा परिवहन

बारिश में गेहूं और चने को भारी नुकसान, पर्ची जनरेट नहीं होने के कारण रुका रहा परिवहन

शमशाबाद।विपिन शर्मा।

एक तरफ कोरोना जैसी महामारी से प्रदेश जूझ रहा था। बही निसर्ग ने किसानों और प्रशासन की चिंता बड़ा दी। बुधवार शाम से शमशाबाद छेत्र में जोरदार बारिश शुरू हुई। जिससे शमशाबाद की अनेक सोसायटीयो में पड़ा लगभग 50 हजार बोरी गेंहू- 3 हजार बोरी चना पूरी तरह से भीग चुका है।

बही सोसायटी प्रभारियों ने बताया कि पर्ची जनरेट नही होने के कारण अनाज का परिवहन नही हो सका। एकदम से जोरदार बरसात होने लगी जिससे भारी नुकसान होने की संभावना है। बही तुलाई बंद होने से हजारों किसान अपना अनाज घर ले जा चुके है और कुछ तो अभी भी इंतज़ार कर रहे है। अपनी फसल की तोल का जिला प्रशासन की बदइंतजामी का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा। बही सिस्टम की नाकामी से हज़ारों कुंटल अनाज बारिश के कारण खराव होने की कगार पर है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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