सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस फोटो की आखिर क्या है सच्चाई..?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस फोटो की आखिर क्या है सच्चाई..?

उज्जैन।

लॉकडाउन(lockdown) में भी लोगों के अंदर भक्ति(Devotion) और विश्वास(believe) की कमी नहीं हुई है। अधिकारी(Officer) हो या आमजन आस्था के बंधन से बंधा होता है। इसी बीच सोशल मीडिया(social media) पर एक फोटो(photo) तेज़ी से वायरल(viral) हो रही है। जहाँ सड़क पर एक पुलिसकर्मी महाकाल मंदिर के आगे माथा टेकते नजर आ रहे हैं। दरअसल ये पुलिसकर्मी कोई और नहीं उज्जैन(ujjain) के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह(SP Manoj singh) हैं। जिन्होंने सोमवार को माथा टेककर महाकाल से प्रार्थना की हैं।

कोरोना(corona) संक्रमण की वजह से देश सहित प्रदेश में लॉकडाउन लगा हुआ है। इसी कारण विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के महाकाल मंदिर(mhakal temple) के पट भी बंद पड़े हैं। लेकिन भक्तों की श्रद्धा किसी बंधन की मोहताज नहीं होती। इस कथन को चरितार्थ करते हुए पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने सड़क पर से ही बाबा महाकाल(mahakal) को माथा टेका और शिखर के दर्शन किए। एसपी मनोज सिंह ने दर्शन के बाद कहा कि मन में बाबा के दर्शन और प्रार्थना करने की इच्छा जागी। इसलिए वो दर्शन को आ गए। वहीँ उन्होंने कहा कि उन्होंने उज्जैन को कोरोना मुक्त (corona free) करने की बाबा से प्रार्थना की है।

बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण एमपी के रेड जोन उज्जैन शहर में हालात अब भी चिंताजनक हैं। मंदिर-मार्केट सब बंद हैं। वहीँ कुछ पहले कुछ पत्रकर के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में घुसने की फोटो वायरल हुई थीं। लॉक डाउन के दौरान ये श्रद्धालु मंदिर में घुसे और सेल्फी भी खींची थीं। बाद में जब ये तस्वीरें वायरल हुईं तब मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू की थी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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