जर्मन के युवक को भाया हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, अब दुनिया भर में मचा रहा धूम

जर्मन के युवक को भाया हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, अब दुनिया भर में मचा रहा धूम

बुरहानपुर।शेख रईस।

हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहा है जिसको सुनकर शायद आप चौक जाएं लेकिन ये सत्य है एक युवक जर्मनी से भारत सैलानी के रूप में आता है लेकिन यहा पहुंचने के बाद पारंपरिक भारतीय संगीत से उसके दिल के तार ऐसे जुड़े की आज वो स्वयं सितार वादक के रूप में पूरे विश्व मे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।

मूल रूप से जर्मनी के रहने वाले सबसटेन ड्रायर ने भारतीय शास्त्री संगीत की विद्या सितार वादन को पूरे विश्व में एक अलग ही पहचान देने की कोशिश की है। सबसटेन ड्रायर ने बताया कि उन्होंने जयपुर घराने से सितार वादन कि प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की पंडित घासी लाल शर्मा उनके गुरु रहे इसके बाद सितार वादक की शिक्षा ग्रहण करने कोलकाता भी गए ।जहां उन्होनें पार्थो चटर्जी ओर निखिल बनर्जी तथा अली अकबर खान के सानिध्य में सितार वादन की बारीकियों को सीखा ।भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ सबसटेन ड्रायर को भारतीय भाषा हिंदी ने भी अपनी ओर खासा आकर्षित किया ।जिसका परिणाम है की जर्मनी भाषा के साथ वे परिपक्व होकर अच्छी हिंदी भाषा बोल रहे है बल्कि विदेश में लोगो को भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ साथ हिदी भाषा का भी ज्ञान दे रहे है। उन्होंने बताया कि संगीत से लगाव के साथ ही मुझे लगा कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए मुझे हिदी भाषा भी सीखनी चाहिए जिसके लिए मुझे करीब 6 से 7 साल लगे हिदी भाषा को सीखने में।

सबसटेन ड्रायर के भारत आने के बाद बुरहानपुर आने की कहानी भी कम दिलचस्प नही है सबसटेन ड्रायर ने बताया कि बुरहानपुर निवासी इंजीनियर राजेश वर्मा के साथ कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर उनकी दोस्ती हुए जिसके बाद उनके आमंत्रण को स्वीकार करते हुए बुरहानपुर आने का फैसला लिया साथ ही उन्होंने बुरहानपुर की ऐतिहासिक धरोहर को लेकर भी जानकारी इकट्ठी कर यहा के इतिहास से रूबरू होने की मंशा लेकर आये और बुधवार को सुबह से ही शाही किला,काला ताज महल,जमा मस्जिद, गुरुद्वारा सहित शहर का भृमण कर खुशी जाहिर की। इसके बाद रात्रि 9 बजे उनके फेसबुक फेंड्रस बुरहानपुर निवासी तबला वादक इंजीनियर राजेश वर्मा के साथ जुगलबंदी कर सितार संध्या में अपने सितार वादन कर संगीत प्रेमियों की दाद भी बटोरी जिसको सुनने काफी संख्या में संगीत प्रेमियों के साथ साथ पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस भी मौजूद थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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