BJP के सत्ता में आते ही शेरा ने जनता से पूछा- “समर्थन दूँ या नही”

BJP के सत्ता में आते ही शेरा ने जनता से पूछा- “समर्थन दूँ या नही”

बुरहानपुर/शेख रईस

मध्यप्रदेश में चले लंबे राजनीतिक घमासान के बाद सोमवार को बीजेपी फिर सत्ता में आ गई और शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार सीएम पद की शपथ ले ली है। उनसे मुख्यमंत्री बनते ही एक बार फिर सियासी समीकरण बदल गए हैं। पिछले दिनों मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार के साथ मजबूती से खड़े बुरहानपुर के निर्दलीय प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह “शेरा” के सुर भी अब बदल गए हैं।

शेरा ने पिछली कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था और पिछले दिनों हुए घटनाक्रम में बराबर कहते रहे थे कि वो हर हाल में कमलनाथ के साथ हैं। लेकिन अब शिवराज के सीएम बनते ही उन्होने जनता के सामने ओपिनियन पोल कर डाला है। दरअसल सुरेंद्र शेरा ने एक वीडियो जारी कर जनता से पूछा है कि उन्हें अब क्या करना चाहिये।

उन्होने इस वीडियो में कहा है कि मुझे क्या करना चाहिये, मैं आप लोगों का विधायक हूं और आपकी बिना अनुमति के मैं कुछ नहीं करूंगा। मैं सिर्फ बुरहानपुर का विकास चाहता हूं और यहां की समस्याओं को निपटाना मेरी प्राथमिकता है। इन सारी बातों को लेकर मैं जनता से जानना चाहता हूं कि क्या मुझे नई सरकार के साथ जाना चाहिये, और इसे लेकर उन्होने जनता से पूछा है कि जो जनता कहेगी वो वैसा ही करेंगे। इस वीडियो संदेश के साथ उन्होने बाकायदा अपना मोबाइल नंबर भी दिया है। एक बार फिर बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस तरह जनता की राय मांगने से जाहिर होता है कि शेरा बीजेपी को समर्थन देने के पूरे मूड में हैं और जनता के समर्थन के बहाने वो अपने दिल की बात ही बयां कर रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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