मदरसों में पढ़ाई करने आये अन्य प्रदेशों के बच्चों को घर भिजवाने, लगाई प्रशासन से गुहार

मदरसों में पढ़ाई करने आये अन्य प्रदेशों के बच्चों को घर भिजवाने, लगाई प्रशासन से गुहार

शेख रईस बुरहानपुर।

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर ज़िले में मदरसों में पढ़ने वाले लगभग 110 से ज्यादा बच्चो को उनके घर भेजने को लेकर प्रयास तेज हो गए है। युवा कांग्रेस नेता नूर काज़ी ने बताया कि धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने देश भर से गरीब जरूरत मन्द बच्चें पढ़ाई करने बुरहानपुर स्थिति विभन्न मदरसों में आते जो साल भर में एक दो बार अपने घर जाते है जिसमें सबसे ज्यादा बच्चों को रमज़ान की छुट्टियों में अपने अपने घर जाने को मिलता है।
चुकी देशभर में लॉक डाउन लगा होने मदरसा फैजुल उलूम,मदरसा नोमान ए राजा,जामिया अशरफिया के करीब 110 से ज्यादा बच्चें जो कि अन्य प्रदेशों के यही बुरहानपुर में फसे हुए हैं। जबकि ज्यादातर बच्चो के घर वापसी के टिकट भी बने हुए थे जो कि लॉक डाउन में ट्रेन बंद होने से निरस्त हो गए है। पत्र के माध्यम से नूर काज़ी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मदरसे के गरीब बच्चों को उनके घर तक भेजने की व्यवस्था शासन करें जिससे वे भी इस मुश्किल घड़ी में अपने परिवार के पास सुरक्षित पंहुच सके।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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