नौकरीपेशा लोगों के प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) से जुड़ा बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेज सीलिंग 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आएंगे।
लेकिन कर्मचारियों के लिए असली सवाल यह है कि 25 हजार रुपये की नई सीमा का मतलब क्या है? क्या अब सैलरी से ज्यादा PF कटेगा? हाथ में आने वाली सैलरी कम होगी? और आखिर यह फैसला फायदे का है या नुकसान का? इसे आसान भाषा में समझते हैं।
पहले 15 हजार थी सीमा, अब 25 हजार रुपये
अब तक EPF Scheme के तहत कवरेज के लिए वेज सीलिंग 15,000 रुपये प्रति माह थी। सरकार ने संसद में भी इससे पहले इसकी पुष्टि की थी कि EPF Scheme, 1952 के तहत मौजूदा वेज सीलिंग 15,000 रुपये है। अब कैबिनेट ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला लिया है।
इसका सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी EPF के लिए लागू मासिक वेज 15,000 रुपये से ज्यादा लेकिन 25,000 रुपये तक है और जो अभी अनिवार्य कवरेज से बाहर थे। सरकार के मुताबिक नई सीमा से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO की सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।
क्या अब 25 हजार रुपये सैलरी वाले कर्मचारी का PF 3,000 रुपये कटेगा?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम होने की संभावना है। 25,000 रुपये वेज सीलिंग होने और हर कर्मचारी की सैलरी से सीधे 3,000 रुपये PF कटने को एक ही बात नहीं समझना चाहिए। सामान्य तौर पर EPF में कर्मचारी का योगदान मौजूदा वेज का 12% होता है। इस हिसाब से 15,000 रुपये पर 12% यानि 1,800 रुपये और 25,000 पर 12% यानि 3,000 होता है।
यानी गणित के हिसाब से अंतर 1,200 रुपये प्रति माह तक बैठता है। लेकिन किसी कर्मचारी की वास्तविक कटौती उसकी EPF मेंबरशिप, Applicable wages, सैलरी स्ट्रक्चर और लागू नियमों पर निर्भर करेगी। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि नई सीलिंग आते ही हर मौजूदा कर्मचारी की take-home salary सीधे 1,200 रुपये घट जाएगी।
फिर कर्मचारी को फायदा क्या होगा?
सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को होगा जो अभी तक वेज सीलिंग के कारण Mandatory EPFO coverage से बाहर रह सकते थे। उन्हें PF आधारित रिटायरमेंट, सेविंग्स और EPFO से जुड़ी social-security व्यवस्था के दायरे में लाने का रास्ता खुलेगा। यही कारण है कि सरकार इसे social-security coverage बढ़ाने वाला फैसला बता रही है।
दूसरा असर रिटायरमेंट सेविंग्स पर हो सकता है। जिन कर्मचारियों के मामले में अधिक applicable wage पर योगदान बनेगा, उनके PF खाते में हर महीने ज्यादा रकम जमा हो सकती है। इसका फायदा लंबे समय में बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने में मिल सकता है।
नुकसान कहां महसूस हो सकता है?
इसका तत्काल असर टेक होम सैलरी पर महसूस हो सकता है। यदि किसी कर्मचारी का कर्मचारी योगदान पहले के मुकाबले बढ़ता है, तो उसके हाथ में आने वाली रकम कम होगी।
मसलन, यदि किसी मामले में योगदान 15,000 रुपये की जगह पूरे 25,000 रुपये Applicable wage पर 12% के हिसाब से होता है, तो कर्मचारी का योगदान 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो सकता है। यानी 1,200 रुपये ज्यादा PF में और 1,200 रुपये कम तत्काल खर्च के लिए हाथ में।
लेकिन यह रकम खत्म नहीं होती, बल्कि कर्मचारी के रिटायरमेंट सेविंग्स में जाती है। इसलिए इसे केवल 1,200 रुपयेका “नुकसान” कहना भी सही तस्वीर नहीं होगी।
30 रुपये हजार, 40 हजार या 50 हजार रुपये सैलरी है तो?
यहां एक और बात समझना जरूरी है। 25,000 रुपये की ववेज सीलिंग का मतलब यह नहीं है कि 50,000 रुपये कमाने वाले हर कर्मचारी का PF अब पूरी 50,000 रुपये वेतन पर अनिवार्य रूप से काटा जाएगा। नई सीलिंग मुख्य रूप से EPFO के Mandatory coverage की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करती है। किसी मौजूदा कर्मचारी की वास्तविक PF डीडक्शन कितनी होगी, यह उसकी EPF स्थिति और योगदान के आधार पर तय होगा।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी कर्मचारी के मामले में पूरी 25,000 एप्लिकेबल वेज पर 12% कर्मचारी योगदान लागू होता है।
15,000 रुपये × 12% = 1,800 रुपये
25,000 रुपये × 12% = 3,000 रुपये
इस उदाहरण में कर्मचारी की तरफ से PF में 1,200 रुपये ज्यादा जा सकता है। यानी सालभर में employee side से 14,400 रुपये अतिरिक्त retirement saving हो सकती है। Employer contribution की संरचना अलग होती है, इसलिए उसे सीधे इसी गणना के बराबर समझना ठीक नहीं होगा।
आखिर फैसला फायदेमंद है या नुकसानदायक?
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि इसे किस नजरिए से देखा जाए। जिन कर्मचारियों की प्राथमिकता ज्यादा इन हैंड सैलरी है, उन्हें योगदान बढ़ने की स्थिति में हर महीने मिलने वाली रकम कम होने से तत्काल दबाव महसूस हो सकता है। वहीं लंबी अवधि के लिहाज से ज्यादा कर्मचारियों का EPFO के दायरे में आना और रिटायरमेंट बढ़ना सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव है। खास तौर पर 15,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच applicable wages वाले कर्मचारियों पर इसका असर ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को mandatory EPFO coverage में लाया जा सकेगा।






