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देश में आज एक भी ऐसी कंपनी नहीं है जो….बदलते दौर को लेकर बोले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, जानिए क्या कहा?

Written by:Rishabh Namdev
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इस समय पूरी दुनिया की नज़रे भारत की अर्थव्यवस्था पर टिकी हुई हैं। भारत इस समय जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का अपना एक तर्क है। चलिए जानते हैं कि रघुराम राजन इसे लेकर क्या कहते हैं।
देश में आज एक भी ऐसी कंपनी नहीं है जो….बदलते दौर को लेकर बोले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, जानिए क्या कहा?

पिछले कुछ समय में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी बहस देखने को मिली है। भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। यही कारण है कि भारत जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि ग्लोबल इनोवेशन नेतृत्व के बिना यह उपलब्धि एकदम खोखली दिखाई दे रही है। दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया के एक कॉलम में लिखते हुए शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने बड़े पैमाने पर घरेलू और सरकारी समर्थन के बावजूद देश की ग्लोबल प्रोडक्ट आइकॉन बनने में हो रही विफलताओं को उजागर किया है।

हालांकि, इस समय भारत स्टार्टअप की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ समय पर नज़र डाली जाए तो युवाओं में स्टार्टअप को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आत्मनिर्भर भारत में जमकर भाग लिया जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का तर्क समझना भी जरूरी है।

जानिए क्या बोले पूर्व गवर्नर रघुराम राजन?

टाइम्स ऑफ इंडिया के कॉलम में लिखते हुए पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत में आज एक भी ऐसी कंपनी नहीं है जो अपने प्रॉडक्ट्स के लिए दुनिया भर में जानी जाती हो। न नाइकी, न सोनी, न टोयोटा, न मर्सिडीज़ और न ही एसएपी। रघुराम राजन का मानना है कि विकसित देशों में भारत की एक भी बड़ी कंपनी का कोई भी बड़ा मॉडल नहीं है। देश का ऑटो निर्यात केवल विशिष्ट मूल्य-संवेदनशील बाज़ारों तक ही सीमित रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने विदेशी प्रतियोगियों के बारे में भी लिखा है। उनके मुताबिक, इन पर टैरिफ लगाना जरूरी है, चाहे भारतीय कंपनियां आयात को इनपुट के रूप में इस्तेमाल करती हों।

घरेलू बाजार का बड़ा होना भी समस्या!

रघुराम राजन के मुताबिक, इन कंपनियों पर रेगुलेटरी प्रबंधन लगाना जरूरी है या फिर प्रतियोगिता को कमजोर करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव शुरू करना चाहिए। हालांकि, इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी है कि जिस प्रकार से घरेलू बाज़ार बड़ा हो रहा है, समस्या और भी बदतर होती जाती है। रघुराम राजन के मुताबिक, आज घरेलू उपभोक्ताओं को संतुष्ट रखने के लिए लगातार नकल की जा रही है। अगर यही काफी है, तो इनोवेशन क्यों करें और वे वैश्विक स्तर पर क्यों जाएं? हालांकि, इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दवा कंपनियां वैश्विक उपस्थिति दर्ज करने में कामयाब रही हैं। जेनेरिक दवाओं से मल्टी फॉर्मुलेशन की ओर रुख करने में ये कंपनियां सफल रही हैं।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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