सोने-चांदी पर बढ़े आयात शुल्क, ईरान-अमेरिका के बीच गहराते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय सराफा बाजार में फिर बड़ी हलचल देखी गई है। 13 मई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बंपर उछाल आया है। 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत 1,68,040 रुपये पर पहुंच गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव 1,54,050 रुपये दर्ज किया गया है।
औद्योगिक मांग और वैश्विक अनिश्चितता के बीच चांदी फिर ऊंचे पायदान पर जा पहुंची है। चांदी के भी दाम 3, 10,000 रुपए के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में चांदी की कीमतों में 18,000 से 20,000 रुपये प्रति किलो तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। विदेशी बाजारों में हाजिर सोना 4,692.64 डॉलर प्रति औंस और चांदी 83.49 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और आयात कम करने के लिए बेसिक कस्टम ड्यूटी और एआईडीसी (AIDC) को मिलाकर कुल शुल्क 15% कर दिया है। चूंकि भारत अपनी खपत का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, इसलिए ड्यूटी बढ़ते ही घरेलू कीमतों में सीधा उछाल आ गया। इससे पहले 2024 के बजट में मोदी सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% की थी।
इतना ही नहीं हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने, ईंधन की खपत कम करने और विदेशी यात्राओं को टालने का आग्रह किया है, जिसका प्रभाव कीमतों के रुप में बाजार पर देखने को मिल रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयात शुल्क में हुई अचानक वृद्धि से आने वाले दिनों में गहनों की मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि शादियों के सीजन के बीच इतनी बड़ी तेजी आम आदमी की जेब पर बड़ा असर डाल सकती है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने निचले स्तर (लगभग 95.62 के पास) पर कारोबार कर रहा है। वहीं कच्चा तेल $120 प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है। चुंकी रुपया कमजोर होने से कच्चा तेल और सोना-चांदी जैसे उत्पादों का आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर इनकी खुदरा कीमतों पर पड़ता है।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे समय में भले ही निवेशक ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं लेकिन उनकी नजरें बुधवार-गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं, जिसमें विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होनी है।
बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी सामने आया है जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए उन्हें नहीं लगता है कि चीन की जरूरत होगी। यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों में फिर तनाव बढ़ता है तो इससे भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
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