आम बजट से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8.05 अरब डॉलर की भारी बढ़ोतरी के साथ 709.41 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पिछले सप्ताह भंडार में 14.16 अरब डॉलर का इजाफा हुआ था और यह 701.36 अरब डॉलर पर पहुंचा था। यह नया रिकॉर्ड सितंबर 2023 में बने 704.89 अरब डॉलर के पिछले उच्च स्तर को भी पार कर गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत भंडार रुपये में स्थिरता लाने और किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से निपटने में मददगार साबित होगा।
सभी प्रमुख घटकों में बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा भंडार के सभी प्रमुख घटकों का योगदान रहा। सबसे बड़ा हिस्सा, यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA), 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर में व्यक्त की जाने वाली इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है।
इस दौरान स्वर्ण भंडार के मूल्य में सबसे अधिक 5.63 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे यह बढ़कर 123.08 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेजी को दर्शाता है।
SDR और IMF रिजर्व भी मजबूत
आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में भारत का विशेष आहरण अधिकार (SDR) 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.73 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास देश की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करता है। यह सरकार और RBI को आर्थिक नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधिक आत्मविश्वास देता है। यह ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, जिसके लिए लगातार उच्च GDP वृद्धि दर बनाए रखना आवश्यक है।





