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IAF को मिलेगी बड़ी ताकत, भारत में बनेंगे 114 राफेल जेट, ₹3.25 लाख करोड़ की मेगा डील पर सरकार कर रही विचार

Written by:Ankita Chourdia
Published:
रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस डील की खास बात यह है कि इन विमानों का निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही किया जाएगा, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
IAF को मिलेगी बड़ी ताकत, भारत में बनेंगे 114 राफेल जेट, ₹3.25 लाख करोड़ की मेगा डील पर सरकार कर रही विचार

भारतीय वायुसेना (IAF) की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय एक ऐतिहासिक सौदे पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव पर जल्द ही रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है, जो वायुसेना के घटते स्क्वाड्रन की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

इस सौदे के तहत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के राफेल विमान सबसे मजबूत दावेदारों में से एक हैं। यह कदम भारत को चीन और पाकिस्तान से एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति में एक बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ पर रहेगा जोर

इस मेगा डील की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इन सभी 114 लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को एक बड़ा impulso देगा। सौदे की शर्तों के अनुसार, इसमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इससे न केवल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश के एयरोस्पेस इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

चीन और पाकिस्तान पर बढ़ेगी रणनीतिक बढ़त

राफेल जैसे अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के भारतीय बेड़े में शामिल होने से सीमाओं पर देश की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ये विमान परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं और मुश्किल इलाकों में सटीकता से हमला कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों की तैनाती से चीन और पाकिस्तान के साथ किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में भारत का पलड़ा भारी रहेगा।

यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इससे भारत को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण मिलेगा और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग और मजबूत होगा। हालांकि, इस तरह के बड़े रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने और विमानों की डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं, लेकिन सरकार इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।