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जब नौकरी की तलाश में Ratan Tata को मिल अपना प्यार, फिर चीन ने डाला शादी में अड़ंगा

Written by:Diksha Bhanupriy
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रतन, टाटा इंडस्ट्रीज का ऐसा नाम है, जिन्होंने केवल इस परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे भारत को दुनिया भर में पहचान दिलाई। आज उनकी पहली पुण्यतिथि है। चलिए इस मौके पर हम आपको उनकी लव स्टोरी बताते हैं।
जब नौकरी की तलाश में Ratan Tata को मिल अपना प्यार, फिर चीन ने डाला शादी में अड़ंगा

रतन टाटा (Ratan Tata) बिजनेस इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम जिसने केवल बिजनेस में भारत का नाम रोशन किया बल्कि मानवता की मिसाल भी बहुत अच्छी तरह से पेश की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने यह सिखाया की करोड़ों रुपए की दौलत होने के बाद भी व्यक्ति जमीन से जुड़ा रह सकता है। 9 अक्टूबर यानी कि आज उनकी पहली पुण्यतिथि है। साल 2024 में आज एक दिन 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ था।

रतन टाटा एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके मन में मनुष्य और जानवरों दोनों के प्रति एक ही तरह की सहानुभूति थी। उनकी दरियादिली की वजह से लोग हमेशा उन्हें याद करते हैं। टाटा ने प्रेम की परिभाषा को तो अच्छी तरह से पेश किया लेकिन खुद जीवन भर कुंवारे रहे। उन्हें प्यार तो हुआ लेकिन प्रेम कहानी कभी पूरी नहीं हो पाई। चलिए आज हम आपको उनकी मोहब्बत की कहानी से रूबरू करवाते हैं।

अमेरिका में पढ़ाई के दौरान हुई मोहब्बत

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ। अपने पिता के सबसे बड़े पुत्र थे जिन्हें उनकी दादी नवाज़बाई टाटा ने बड़ा किया। बचपन से ही उन्हें परोपकार और जन सेवा के वातावरण में आगे बढ़ने का मौका मिला। अपने प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने मुंबई के कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल से पूरी की और 1955 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय चले गए।

अमेरिका में आर्किटेक्चर स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की। इस तलाश में वह अर्ल अमोस की कंपनी जॉन्स एंड एमोस तक पहुंचे।

नौकरी की तलाश में Ratan Tata को मिला प्यार

द लॉस एंजेलिस में थे और यहां उनकी मुलाकात फ्रेडरिक की 19 साल की बेटी कैरोलिन एमोस से हुई। यह मुलाकात दिल देने वाली साबित हुई, रतन टाटा और कैरोलिन एक दूसरे को चाहने लगे। दोनों की रुचि एक ही तरह की चीजों में थी जिस वजह से यह ज्यादा करीब आ गए। कैरोलिन की मां भी टाटा को अपनी बेटी के लिए सबसे परफेक्ट मानती थी। दोनों का रिश्ता उम्मीदों भरा था और परिवार भी शादी के लिए राजी हो गए थे।

चीन बना शादी में अड़ंगा

दोनों के बीच प्रेम गहरा था चला गया लेकिन 1962 में अपने बीमार दादी से मिलने के लिए टाटा भारत आ गए। कैरोलिन भी आने वाली थी लेकिन इस साल भारत चीन के बीच युद्ध छिड़ गया। 1 महीने के भीतर युद्ध विराम की घोषणा हुई लेकिन आज सट्टा की स्थिति के बीच कैरोलिन के परिवार का भारत आना संकट भर लग रहा था। आखिरकार युद्ध की वजह से दोनों ने अलग होने का फैसला लिया।

थॉमस मैथ्यू ने अपनी जीवनी में इस बारे में जिक्र किया है कि युद्ध की वजह से स्थिति काफी नाजुक लग रही थी और दोनों अलग हो गए थे। आखिर में कैरोलिन ने ओवन जॉन्स से शादी की जो एक पायलट और वास्तुकार थे। सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति से शादी की थी जो रतन जैसा ही था।

हमेशा कायम रही दोस्ती

कैरोलिन शादी कर अपनी दुनिया बसा चुकी थी और उधर रतन अपने बिजनेस में व्यस्त हो गए थे। अलग होने के दशकों बाद एक हॉलीवुड फिल्म देखकर कैरोलिन को टाटा की याद आ गई। उन्होंने ऑनलाइन जानकारी निकालने की कोशिश की तब उन्हें पता चला कि वह टाटा संस एंड टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष बन चुके हैं। उन्होंने एक ईमेल के जरिए भारत आने की इच्छा जताई और टाटा ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। साल 2008 में यह दोनों एक बार फिर मिले और उनके बीच दोस्ती का नया रिश्ता शुरू हुआ। 2017 में रतन के 80वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में भी कैरोलिन भारत आई थी।

ऐसा कहा जाता है कि गुजरते हुए समय के साथ इन दोनों की दोस्ती गहरी होती गई। कैरोलिन जब भी भारत आई टाटा से जरूर मिलती थी और टाटा जब भी अमेरिका जाते थे उनसे जरूर मिलते थे। इन दोनों की अटूट दोस्ती में लोगों को सिखाया की अप्रत्याशित परिस्थितियों से उबरकर व्यक्ति कैसे आगे बढ़ सकता है।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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